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भारत में कभी छपा था जीरो रुपये का नोट, नहीं देखी तो तस्वीरें देख लीजिए और क्यों छपा ये भी जान लीजिए

भारत में कभी छपा था जीरो रुपये का नोट, नहीं देखी तो तस्वीरें देख लीजिए और क्यों छपा ये भी जान लीजिए


 
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Newz Fast, New Delhi Zero Rupee Note: दो हजार रुपये के नोट के जमाने में अगर आपसे कहूं तो कभी देश में जीरो रुपये का नोट भी छपा था तो शायद सुनकर आपको यकीन न हो.

हो सकता है कि आप सोच रहे हों कि ये क्या बात हुई भला, अगर जीरो रुपये का नोट(Zero Rupee Note) हुआ तो फिर वह था किस काम का, क्योंकि जीरो रुपये में न तो कुछ खरीद सकते हैं और ना ही उसे किसी को दे सकते हैं. तो जीरो रुपये के नोट की कहानी को समझने के लिए भारत में भ्रष्टाचार की कहानी को समझना होगा.

साल 2007 में आया था सामने

दरअसल भ्रष्टाचार(Corruption) भारत के विकास में एक ऐसी समस्या है, जिसे खत्म करने का संकल्प तो हर कोई लेता है लेकिन इसे पूरी तरह से आज तक नहीं उखाड़ फेंका गया.

तमाम नेताओं से लेकर सामाजिक संगठनों तक ने कई अभियान चलाए, यहां तक कि रिश्वतखोर अधिकारियों को पकड़ने के लिए कई टीमें भी काम करती हैं लेकिन फिर भी रिश्वतखोरी(Bribery) अपने चरम पर है. ऐसे में साल 2007 में एक ऐसा ही आइडिया आया.
किसने छापा था 50 रुपये का नोट

5th Pillar नाम के एक एनजीओ(NGO) ने एक नया आइडिया निकाला. जिसके तहत जीरो रुपये के नोट छापे गए और लाखों लोगों को बांटे गए. इस नोट की खासियत ये थी कि इसे भ्रष्टाचार खत्म करने के उद्देश्य से लाया गया था.

नोट के ऊपर एनजीओ का नाम लिखा था और गांधीजी की तस्वीर छपी थी. इस नोट के ऊपर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(RBI) की जगह भ्रष्टाचार खत्म करो(Eliminate Corruption) हिंदी और अंग्रेजी में लिखा था. इसका उद्देश्य ये था कि अगर आपसे कोई रिश्वत मांगे तो आप उसे जीरो रुपये का नोट पकड़ाएं, इससे वह शर्मिंदा होगा और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी. 


भ्रष्टाचार मिटाने की पहल

मतलब इसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से नहीं बल्कि एनजीओ की ओर से जारी किया गया था, जो भ्रष्टाचार मिटाने की एक पहल थी. जानकारी के मुताबिक अभी भी यह नोट देखने को मिल जाता है, लेकिन असल रुपये से इसका कोई लेना देना नहीं है.

देखने में यह 50 के नोट की तरह हुबहू लगता है. जिसे देखकर आप पहली नजर मे कंफ्यूज हो सकते हैं लेकिन अब आप कंफ्यूज नहीं होंगे और ना ही इसे चूरन वाला नोट समझेंगे.