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Wheat: अगले सप्ताह घरेलू बाजार में सस्ता होगा गेहूं, निर्यात पर प्रतिबंध का दिखेगा असर

भारत को बढ़ती घरेलू कीमतों पर नियंत्रण रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। इस फैसले से निश्चित तौर पर कीमतों में नरमी लाने में मदद मिलेगी।

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wheat buy opportunity

Newz Fast, New Delhi भारत सरकार ने गेहूं निर्यात पर रोक लगा दी है। इसका असर अगले सप्ताह में देखने को मिल सकता है। सरकार के इस फैसले के बाद घरेलू कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि भारत में गेहूं ( wheat)के उत्पादन में मामूली गिरावट आने के साथ ही वैश्विक आपूर्ति कम होने से भी इसकी कीमतों में वृद्धि हुई है। यही वजह है कि पिछले महीने गेहूं और आटे की घरेलू कीमतें भी बढ़ गईं।

हालांकि उन्होने ये भी साफ किया कि भारत में गेहूं के उत्पादन में संभावित गिरावट और सरकारी खरीद (government procurement) में भी कमी आने का गेहूं की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पर असर पड़ने की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा कि पीडीएस सुचारू रूप से चलती रहेगी।

गेहूं के निर्यात पर रोक

वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने शुक्रवार रात को गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हालांकि, इसने अधिसूचना की तारीख या उससे पहले जारी हो चुके वैध एलओसी के साथ गेहूं निर्यात की अनुमति दी है।

देश ने चालू वित्त वर्ष में अब तक 45 लाख टन गेहूं के निर्यात का अनुबंध किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसमें से 14।6 लाख टन गेहूं अप्रैल में निर्यात किया गया था।

खाद्य सचिव ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वैश्विक मांग बढ़ रही थी और विभिन्न देश प्रतिबंध लगा रहे थे, धारणाओं से कीमतें तय हो रही थीं।

हमें पूरा विश्वास है कि अब यही सेंटीमेंट्स भी कीमतों को नीचे लाने का काम करेंगी। उन्होंने कहा कि इन दिनों कई क्षेत्रों में वैश्विक कीमतों के साथ-साथ महंगाई का भी आयात होता है।

गेहूं के मामले में भी यही हो रहा था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं की कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों का गेहूं 420-480 डॉलर प्रति टन के ऊंचे भाव पर बिक रहा था।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में भारत को बढ़ती घरेलू कीमतों पर नियंत्रण रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। इस फैसले से निश्चित तौर पर कीमतों में नरमी लाने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने कहा कि कीमतों में आने वाली गिरावट की मात्रा के बारे में कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, लेकिन घरेलू कीमतों में एक-दो हफ्ते में निस्संदेह कमी आएगी।

भारत से गेहूं का निर्यात बढ़ा

मजबूत वैश्विक मांग के कारण 2021-22 में भारत का गेहूं निर्यात बढ़कर 70 लाख टन यानी 2.05 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। डीजीएफटी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में कुल गेहूं निर्यात में से लगभग 50 प्रतिशत खेप बांग्लादेश भेजी गई थी।

पिछले साल इसी अवधि में 1,30,000 टन के मुकाबले देश ने इस साल लगभग 9,63,000 टन गेहूं का निर्यात किया। भारत को 2022-23 में एक करोड़ टन गेहूं का निर्यात करने की उम्मीद थी।

वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि भारत गेहूं के निर्यात की खेप को बढ़ावा देने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए नौ देशों-मोरक्को, ट्यूनीशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, वियतनाम, तुर्की, अल्जीरिया और लेबनान में व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजेगा।

निजी व्यापारियों द्वारा भारी उठान और पंजाब-हरियाणा में कम आवक के कारण मौजूदा रबी विपणन सत्र में एक मई तक भारत की गेहूं खरीद भी 44 प्रतिशत घटकर 1.62 लाख टन रह गई है। सरकार ने एक साल पहले की अवधि में 2.88 लाख टन गेहूं की खरीद की थी।

रबी विपणन सत्र अप्रैल से मार्च तक चलता है। निर्यात के लिए अनाज की बढ़ती मांग के बीच निजी कंपनियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक कीमत पर गेहूं खरीदा है।

केंद्र ने विपणन वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 4.44 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले विपणन वर्ष में यह 4.33 लाख टन था।