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Truth of Tajmahal: ताजमहल का सच सामने लाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका ताजमहल के 22 कमरों का क्या है राज?

22 बंद कमरों को खोल कर जांच कराए जाने की मांग की गई
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tajmhal in controvercy

Newz Fast, New Delhi इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की याचिका दाखिल कर ताजमहल के इतिहास का सच सामने लाने की मांग की गई है

कहां गया है कि इसके तथ्यों की जानकारी के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा साथ ही ताजमहल के 22 बंद कमरों को खोल कर जांच कराई जाए क्योंकि कई लोगों का मानना है कि यह वास्तव में भगवान शंकर का मंदिर था

जिसे तोड़कर ताजमहल ताजमहल बनाया गया जिसका पूर्व में नाम तेजो महालय था यह याचिका कोर्ट की रजिस्ट्री में शनिवार को दाखिल की गई के पास होने के बाद इसकी सुनवाई संबंधित के सामने होगी याचिका में 1951 और 1958 में बने कानून जिसमें ताज महल फतेहपुर सिकरी आगरा के लाल किले के घोषित किया गया था घोषित किए जाने की मांग की गई है

याचिका में केंद्र सरकार केंद्र सरकार द्वारा विधान के परिधानों के विरुद्ध घोषित किए जाने की भी मांग की गई है अयोध्या निवासी डॉ रजनी सिंह की ओर से दाखिल याचिका में केंद्र सरकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा राज्य सरकार को विपक्षी पक्षकार बनाया गया है याचिका में इतिहासकार पीओके की किताब ताजमहल का हवाला देते हुए कहा गया है

कि ताजमहल वास्तव में तेजो महालय है जिसका निर्माण 1212 एडी में राजा परमार बीरदेव द्वारा कराया गया था बाद में जयपुर के महाराजा मानसिंह ने इसका संरक्षण किया मुगल शासक शाहजहां ने मानसिंह से इस ताजमहल को लेकर हड़प लिया याचिका में अयोध्या के जगत गुरु परमहंस के वहां जाने व उन्हें उनके भगवा वस्त्रों के कारण रोके जाने संबंधी विवाद का भी जिक्र किया है

कहा गया है कि कमेटी के गहन अध्ययन से ताजमहल के संबंध में उठ रहे सभी विवाद शांत हो जाएंगे और संप्रदायिक सोने के लिए अच्छा होगा आगरा में भी विचाराधीन है याचिका आगरा में ताजमहल के बाद हिस्सों में वीडियोग्राफी कराने की संबंधित याचिका विचाराधीन है अन्य की ओर से अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने सिविल कोर्ट में ताजमहल कोटेश्वर महादेव नागेश्वर मंदिर घोषित करने की याचिका दायर की थी