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बेबी की एक हंसी से पूरे घर को मिलते हैं ढेरों फायदे, खुद डॉक्‍टर ने बताए

आप इतना तो समझते होंगे कि बेबी को हंसता देख आपके चेहरे पर भी मुस्‍कान आ जाती है लेकिन क्‍या आप ये जानते हैं कि बेबी के हंसने से उसे कई तरह के फायदे मिलते हैं।
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bache ki khusi s ghar m milte h fide

Newz Fast, New Delhi  इस आर्टिकल में पीडियाट्रिशियन ने बताया है कि बेबी के हंसने से क्‍या लाभ मिलते हैं। बेबी की एक हंसी से पूरे घर को मिलते हैं ढेरों फायदे, खुद डॉक्‍टर ने बताए

शिशु के आने पर जिंदगी में जैसे बहार-सी आ जाती है। जो पैरेंट्स लंबे समय से बेबी के होने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए तो ये खुशी और भी ज्‍यादा प्‍यारी होती है।

आपने भी कई पैरेंट्स को यह कहते हुए सुना होगा कि बेबी के आने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है और अब वो पहले से ज्‍यादा खुश रहते हैं या अपने बच्‍चे का चेहरा देखकर उनकी सारी थकान उतर जाती है।

वहीं बेबी के चेहरे की मुस्‍कान देखकर तो जैसे सदियों का दुख दूर हो जाता है और ये एहसास सिर्फ पैरेंट्स को नहीं बल्कि बेबी को मुस्‍कुराते हुए देखने वाले हर इंसान को होता है।

शिशु जब हंसता, मुस्‍कुराता या किलकालियां मारता है,

तो पूरा घर खुशी से गूंजने लगता है। शिशु की हंसी (benefits of laughing for babies) एक से दूसरे चेहरे पर भी आ जाती है। ज्‍यादातर बच्‍चे जन्‍म के बाद पहले कुछ हफ्तों में ही मुस्‍कुराना शुरू कर देते हैं

लेकिन दो महीने का शिशु दूसरों को मुस्‍कुराते हुए देखकर या छूने पर या आवाज सुनने पर मुस्‍कुराना शुरू करता है। इसे सोशल स्‍माइल कहते हैं और दूसरों से बात करने का यह बेबी का पहला तरीका होता है।

इस आर्टिकल में अमेरिका की पीडियाट्रिशयन डॉक्‍टर जुल्‍मा लारा द्वारा बच्‍चों के हंसने के फायदों के बारे में बताया गया है।
​बेबी कब शुरू करता है हंसना

3 से 5 महीने का बेबी तेज से हंसना और किलकारियां मारना शुरू कर देता है। इस समय वो अलग-अलग आवाजें निकालना सीख रहा होता है। उसके हंसने पर, आप जो रिएक्‍शन देते हैं, वो देखना बेबी को बहुत अच्‍छा लगता है।

इससे बड़े होने पर बेबी छुपम-छुपाई खेलने पर लात मारता है और आपके चेहरे के हाव-भाव देखकर और आवाज सुनकर हंसता है।

​कितने हैं फायदे

डॉक्‍टर जुल्‍मा कहती हैं कि हंसने से छोटे बच्‍चों को परिवार के सदस्‍यों के साथ बॉन्‍ड बनाने में मदद मिलती है। इससे बच्‍चे के सोशल स्किल्‍स, प्रॉब्‍लम सॉल्विंग स्किल्‍स, क्रिएटिविटी और याद रखने के कौशल में भी वृद्धि होती है।

हंसने से आत्‍म-विश्‍वास बढ़ता है और सहानुभूति का विकास होता है। जो पैरेंट्स बच्‍चे को हंसाने की कोशिश करते हैं, उनके घर में हमेशा पॉजिटिविटी और खुशियां रहती हैं।