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रोटी तक पहुंची बढ़ती महंगाई की आग, जानिए India में क्यों महंगा हो रहा है आटा

अप्रैल 2022 में देश में आटे की औसत खुदरा कीमत 32.38 रुपये प्रति किलोग्राम  (average retail price of flour) रही थी। मई महीने में इसमें और बढ़ोतरी (Flour price increase) दिख रही है। 

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Newz Fast, New Delhi  बढ़ती महंगाई की आग अब रोटी तक भी पहुंच चुकी है। अगर आप ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप से रोटी मंगवाएंगे तो आपके करीब 26 रुपए की एक तवा रोटी मिलेगी।

अब रोटी महंगी हुई है, इसका मतलब आटे और गेहूं की कीमतें (Flour and Wheat Prices) उच्च स्तर पर हैं।

अप्रैल 2022 में देश में आटे की औसत खुदरा कीमत 32.38 रुपये प्रति किलोग्राम  (average retail price of flour) रही थी। मई महीने में इसमें और बढ़ोतरी (Flour price increase) दिख रही है। 


ये जनवरी, 2010 के बाद से सबसे अधिक है। मतलब इस समय आटे की कीमत (Atta Price) 12 वर्षों के उच्च स्तर पर है।

देश में आटे की कीमतों में बढ़ोतरी (flour prices) इसलिए है, क्योंकि गेहूं का उत्पादन और भंडारण (Wheat Production and Storage) दोनों घट रहे हैं। इस समय दुनिया भर में गेहूं की कीमतें (Wheat Prices) उच्च स्तर पर हैं।

देश के इन हिस्सों में सबसे महंगा है आटा (flour)
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आटे (flour) की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत सात मई को 32.78 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यह एक साल पहले की तुलना में 9.15 फीसद अधिक है। 


156 सेंटर्स के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गेहूं के आटे (wheat flour) की सबसे अधिक कीमत पोर्ट ब्लेयर में 59 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं, सबसे सस्ता आटा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में 22 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल रहा था।

अगर हम मेट्रो सिटीज (metro cities) की बात करें, तो आटे की औसत कीमत मुंबई (Mumbai) में सबसे अधिक 49 रुपये प्रति किलोग्राम देखने को मिली।

इसके बाद चेन्नई (Chennai) में 34 रुपये प्रति किलोग्राम, कोलकाता में 29 रुपये प्रति किलोग्राम और दिल्ली में 27 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

जानिए भारत में क्यों महंगा हो रहा आटा Why flour is getting expensive in India

  • 1. यूक्रेन दुनिया में गेहूं का बड़ा निर्यातक देश है। यहां मौजूदा युद्ध के चलते गेहूं का उत्पादन काफी गिर गया है। इससे दुनियाभर में गेहूं की भारी किल्लत हो गई है। भारत के गेहूं के लिए भी विदेशों से भारी मांग आ रही है। यही कारण है कि गेहूं (wheat prices) के दाम बढ़ रहे हैं और आटा महंगा हो गया है।
  • 2. बीते वित्त वर्ष में भारत ने 70 एलएमटी (LMT) गेहूं का निर्यात किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति में कमी आने से चालू वित्त वर्ष में भी भारत का गेहूं निर्यात (wheat export) अधिक रहने की संभावना है।
  • 3. डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी (diesel prices hike ) के चलते भी कीमतों पर असर पड़ रहा है। डीजल के दाम बढ़ने से किसानों के लिए लागत बढ़ रही है और परिवहन महंगा हो गया है। इससे भी गेहूं और आटे की कीमतों में तेजी (Wheat and flour prices rise) आई है।
  • 4. केंद्र सरकार (central government) को उम्मीद है कि सभी कल्याणकारी योजनाओं के तहत गेहूं की आपूर्ति के बाद वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान 100 एलएमटी गेहूं का संतुलित स्टॉक तैयार हो सकता है। हालांकि, मार्च महीने में गर्मी काफी अधिक होने के चलते गेहूं के उत्पादन (wheat production) पर असर पडने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार, कुल गेहूं उत्पादन लक्ष्य से कम रह सकता है। इससे गेहूं की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
  • 5. दुनियाभर में गेहूं की कीमतों में वृद्धि (Increase in wheat prices) हो रही है। भारत में गेहूं की खुदरा कीमत मार्च 2022 में बढ़कर 28.67 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। यह मार्च 2021 में 27.90 रुपये प्रति किलोग्राम थी। अप्रैल 2022 में भारत में आटे की कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखी गई है।
  • 6. हालांकि, सरकार कीमतों (WHEAT PRICES) पर नजर बनाए हुए है। केंद्र सरकार चालू सीजन में चल रही खरीद के साथ-साथ गेहूं की घरेलू कीमतों की लगातार निगरानी कर रही है।

2-3 महीनों में 10 फीसद तक बढ़ सकती हैं कीमतें (कीमतें)


देश का आटा उद्योग (flour industry) काफी चिंता में है और इसके लीडर्स इस हफ्ते खाद्य सचिव के साथ बातचीत करेंगे। इनका कहना है कि अगर सरकार तेजी से हो रहे निर्यात (export) पर कोई कदम नहीं उठाती है, तो आटे की कीमतें अगले 2-3 महीनों में 10 फीसद तक बढ़ जाएंगी। 


निजी व्यापारियों द्वारा भारी खरीदारी, भारी निर्यात (heavy export) और किसानों द्वारा स्टॉक करने से गेहूं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, मिल मालिक आने वाले समय में कीमतें बढ़ने के चलते अधिक स्टॉक करने का फैसला नहीं ले पा रहे हैं। उन्हें डर है कि सरकार दालों और तेल की तरह ही कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आटे के स्टॉक (stock) पर सीमा लगा सकती है।

तुर्की ने दिया 50,000 टन गेहूं का ऑर्डर (wheat order)


पहली बार तुर्की ने भारत को 50,000 टन गेहूं के आयात का ऑर्डर  (wheat import order) दिया है। इससे गेहूं की कीमतों में और वृद्धि होगी। इसमें हाल के हफ्तों में पहले ही 15 फीसद तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। दुनियाभर में गेहूं की आपूर्ति बाधित रहने से भारतीय गेहूं की मांग बढ़ रही है। हालांकि, इससे भारत के किसानों को फायदा होगा। 
बता दें कि यूक्रेन दुनिया के उच्च ग्रेड गेहूं का लगभग पांचवां और कुल गेहूं का 7% उत्पादन करता है। भारत में निजी व्यापारियों द्वारा किसानों से खरीदे गए गेहूं की एक बड़ी मात्रा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक कीमत पर है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों (international prices) में तेजी आई है। व्यापारी वैश्विक बाजारों से अच्छे निर्यात ऑर्डर की उम्मीद में इन्वेंट्री तैयार कर रहे हैं।