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आंसू, भय और प्रार्थना... धधकती बिल्डिंग में अपनों के लिए दहाड़ें मार रहे थे लोग, मुंडका में दिखा दिल दहला देने वाला दृश्य

दिल्ली के मुंडका में ऐसा भयावह दृश्य सामने आया जिसे देखकर लोगों का सीना छलनी हो गया। चार मंजिला बिल्डिंग धू-धू कर जल रही थी और लोग अपनों की जान की हिफाजत के लिए प्राथर्ना कर रहे थे।
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Newz Fast,New Delhi  कई लोगों को बिल्डिंग की खिड़कियों से नीचे छलांग लगाते हुए देखा गया था। मुंडका की आग में खाक हुईं 27 जिंदगियां।प्रशासन और पैसे वालों की मिलीभगत ने लील लीं 27 जिंदगियां

मुंडका की एक चार मंजिला इमारत में लगी आग में दिखा भयावह दृश्य

अपनों की तलाश में लोग इधर उधर पूछते फिर रहे थे, वो जार-बेजार रोते बिलखते दिखे मुंडका में आग लगने के बाद दिल दहला देने वाले दृश्यों के बीच लोग अपने परिजनों के लिए दुआएं कर रहे थे 

जैसे ही आग लगने का पता चला, लोग दूर-दूर से अपने रिश्तेदारों-दोस्तों का हाल-चाल लेने मौके पर पहुंचने लगे। वो मोबाइल में रिश्तेदारों की तस्वीर लोगों को दिखा रहे थे और पूछ रहे थे कि इन्हें देखा क्या, कैसे हैं ये?

अफरा-तफरी के इस माहौल में मृतकों को निकाला जा रहा था और उनकी पहचान होते ही लोग दहाड़ खा रहे थे। एक बिल्डिंग में लगी आग ने कुल 27 जिंदगियां लील लीं।

कई लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदते दिखे तो कई लोग रस्सियों के सहारे इमारत से नीचे आते दिखाई दिए।

मौके पर सब सन्न, किसी के पास कोई जवाब नहीं

सुनीता अपनी रिश्तेदार सोनम को ढूंढ रही थीं। उन्होंने कहा कि वो सुरक्षा व्यवस्था के कारण तुरंत बिल्डिंग के पास भी नहीं पहुंच सकी थीं। दूसरे कई लोगों ने आरोप लगाया कि वो अपने परिजनों के बारे में पुलिस वालों से पूछते रहे, लेकिन कुछ जवाब नहीं मिलता।

इस्माइल खान ने अपनी बहन को तब जिंदा देखा था जब आग लगी थी। फिर वह दौड़ा-भागा उसे बचाने की कोशिश में जुट गया। इस्माइल ने कहा, 'मैंने उससे शाम 5 बजे बात की और फायर इंजिन ट्रैफिक जाम में फंसा था।

मैंने उसे उसकी दोस्त के साथ खड़ा देखा था और उससे कूदने को कहा था, लेकिन वो हिम्मत नहीं जुटा सकी।' उसने कहा, 'मैंने बिल्डिंग फांद करके उस तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन मैं घायल हो गया।

हमने हाल ही में अपने पिता को खोया था और लगा कि अगर कुछ हो गया तो मेरे लिए मुश्किल हो जाएगा। मैं सच में उसे बचाना चाहता था।'

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, 'हम अपनी साली को ढूंढने एक से दूसरे अस्पतालों के बीच भाग-दौड़ कर रहे थे। किसी ने उसके बारे में कुछ नहीं बताया। पुलिस वालों ने भी हाथ खड़े कर दिए।

उन्होंने किसी तरह की सूचना से इनकार कर दिया। पुलिस वालों ने कहा कि अब एक ही रास्ता बचा है कि मृतकों की पहचान की जाए।'

हादसा तो तय था, पहले भी लग चुकी थी आग: स्थानीय लोग

स्थानीय लोगों ने कहा कि वहां अवैध रूप से बिल्डिंगें बनाई गई हैं। उन्हें देखकर सबको अंदाजा था कि यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

कई बार आग की छोटी-छोटी घटनाएं हुईं, लेकिन तब हंगामा नहीं बरपा और बात को दबा दिया जाता। उनका कहना है कि अधिकारियों और बिल्डरों के बीच ऐसा नेक्सस है कि सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर बिल्डिंगें बनाने की अनुमति मिल जाती है।

मुंडका की आग के कारण रोहतक रोड पर ट्रैफिक का संचालन भी प्रभावित हुआ। उधर से तीन घंटे तक आवाजाही बंद कर दी गई और बाद में एक तरफ का रास्ता खोला गया।

100 दमकल कर्मियों ने चलाया राहत अभियान

दिल्ली फायर सर्विस के डायरेक्टर अतुल गर्ग ने कहा, '30 से ज्यादा दमकल वाहन और 100 से ज्यादा कर्मचारी मौके पर भेजे गए थे। ऐसा लगता है कि बिल्डिंग में ज्वलनशील पदार्थ इकट्ठा किए गए थे।

इस कारण आग तेजी से फैल गई। अधिकांश शव पूरी तरह जले हुए थे।' उधर, राष्ट्रीय आपदा विमोचन बल (NDRF) की एक टीम भी देर रात मौके पर पहुंची और राहत कार्यों को अंजाम दिया। बाद में कूलिंग ऑपरेशन भी शुरू किया गया।

पुलिस ने बताया कि एक विशेष सूचना केंद्र बना दिया गया है ताकि लोगों को उनके परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों के बारे में जानकारी दी जा सके।
उपहार सिनेमा, दाल मंडी, अब मुंडका अग्निकांड... दिल्‍ली में इस तरह के हादसे क्‍यों नहीं रुकते?
मुंडका की जिस फैक्टरी में आग लगी, वहां के इंतजामों की हालत ये थी कि बाहर निकलने के लिए एक ही रास्ता था और उसी रास्ते पर जनरेटर लगा था, जिससे आग की शुरुआत हुई। नतीजा ये हुआ कि लोग बाहर ही नहीं निकल पाए।

दिल्ली में ऐसी अनेकों फैक्ट्रियों मिल जाएंगी, जहां ऐसे इंतजाम ही नहीं है कि अगर आग लग जाए तो बाहर निकलने का कोई वैकल्पिक रास्ता हो।

फैक्ट्रियां ही नहीं, दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे बिल्डर फ्लैट हैं, जहां चार मंजिला इमारत में उसी जगह बिजली के मीटर लगाए गए हैं जहां से लोग उपर की मंजिलों पर आ या जा सकें। कई ऐसे फ्लैटस में हादसे हो चुके हैं,

जिनमें मीटरों में ही आग लगने से उपर धुआं भर गया। जिससे लोग सीढ़ियों से नीचे आ ही नहीं सके। लेकिन इन हादसों के बावजूद अब तक बिल्डर फ्लैटस में इस चलन को समाप्त करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।

आग लगने की घटनाओं की एक वजह ये भी है कि जब इमारतें बनती हैं, उस वक्त अग्निशमन उपायों पर विचार ही नहीं किया जाता। यही वजह है कि दिल्ली में हजारों की संख्या में ऐसी फैक्ट्रियां हैं,

जिनमें न तो अग्रिशमन के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही बिल्डिंग के नक्शा बनाते वक्त ऐसी व्यवस्था की गई कि आग लगने पर लोगों को बचाया जा सके।

जरूरी है कि दिल्ली फायर सर्विस की अगुवाई में हर जिला स्तर पर ऐसी टीमें बनाई जाएं, जो अपने अपने एरिया की इमारतोां की पहचान करके ये सुनिश्चित करें कि उन बिल्डिंगों में ऐसे सेफ्टी इंतजाम हों,

जिससे इस तरह के हादसों से बचा जा सके। इसके साथ ही जब भी बिल्डिंग नियमों में इस तरह से बदलाव किए जाएं कि बिल्डिंग में आग से जब तक बचाव न हों, उसमें रहने या काम करने की इजाजत न मिले।

27 लाशें मिलीं, 12 लोग झुलस गए

ध्यान रहे कि पश्चिमी दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास स्थित चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में शुक्रवार शाम आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 12 अन्य झुलस गए।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि आग इमारत की पहली मंजिल से लगनी शुरू हुई जहां सीसीटीवी कैमरा और राउटर बनाने वाली कंपनी का ऑफिस था।

कंपनी मालिक गिरफ्तार, बिल्डिंग मालिक की तलाश

पुलिस ने बताया कि कंपनी के मालिकों- हरीश गोयल और वरुण गोयल को हिरासत में ले लिया गया है और इमारत के मालिक की पहचान मनीष लाकरा के रूप में हुई है।

इसने कहा कि वह इमारत के सबसे ऊपर वाले तल पर रहता था और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।

मृतक के परिजनों को मिलेगा मुआवजा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आग लगने से हुई लोगों की मौत पर शोक जताया।

कोविंद ने कहा कि वह इमारत में आग लगने से कई लोगों की मौत से अत्यंत दुखी हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से इस हादसे में जाने

गंवाने वालों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की राशि दी जाएगी।