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दाम्पत्य के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानियां, स्त्री मन को बतलाती हैं

महिलाओं के मन में झांकने की कोशिशों में अक्सर एकरसता उत्पन्न होने की गुंजाइश निकल आती है, ख़ासतौर पर जब बात गृहिणियों की हो रही हो।
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khani

Newz Fast,New Delhi  सुमन बाजपेयी जी के कथा संकलन की सारी कहानियां दाम्पत्य के इर्द-गिर्द बुनी गई हैं। हर कहानी रिश्ते की है, लेकिन हर बार विविधता के साथ सामने आती है।

अपने घर में, अपनी दुनिया में अपने लिए स्पेस ढूंढती महिला पात्र दूसरों से ग़ाफिल नहीं हैं। जहां ग़लत हैं, वहां उसकी स्वीकार्यता भी है और जहां विद्रोह ही लाज़मी है, वहां से उठकर चले जाने का साहस भी मौजूद है।

संकलन की पंद्रह कहानियों में हर कहानी

अपने असली मुद्दे की परत को कुछ देर बाद खोलती है, जो पाठक को नई कहानी की राह से परिचित करवाने में मददगार साबित होता है।

गहरे अनुभव व अवलोकन की अनुभूतियों से पगी कलम से निकली कहानियां पाठक को आपबीती-सा अहसास कराने में समक्ष हैं। कहानियों की रवानी में लेखिका ऐसी कई बातें पाठक के सामने यकायक रख देती हैं,

जो सोचने में विवश कर देती हैं

हर कहानी का अंत या अंतिम चरण में पाठक अंदाज़ा नहीं लगा सकते कि मुख्य पात्र कहानी को किस दिशा में ले जाएगी। यह रहस्य सुखद अहसास ही देता है। तकरीबन सभी कहानियों के स्त्री पात्रों के नाम सुंदर हैं, जो एक अलग आनंद देते हैं।

कथा के गढ़न को अगर साहित्य व भाषा के पेंचों के चश्मे से ना देखा जाए, तो इनका भरपूर आनंद लिया जा सकता है। भाषा सरल है और घटनाक्रम की गति तीव्र है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मनोविज्ञान की दृष्टि से इसे सरल माना जा सकता है।

स्त्री मन की भीतरी परतों में कौन-से भाव, कैसी सुरक्षाएं-असुरक्षाएं या भय समाए रहते हैं, वह क्यों और क्या अपेक्षाएं रखती है, इसका लेखा-जोखा कहानियों में है।

मुश्किलें हैं, समस्याएं हैं, तो जवाब भी हैं।

इन्हें समाधान के तौर पर ना भी देखा जाए, तो भी पात्रों ने जो पहल की है, उससे इंकार भी नहीं किया जा सकता है। संकलन की पहली कहानी ‘दो रंग की गोटियां’ रोचकता का अलग रंग रखती है,

ख़ासतौर पर उसकी मुख्य पात्र की प्रतिक्रियाओं के लिहाज़ से। ‘सपनों के पंख’ और ‘लीव विद पे’ हर तरक्कीपसंद स्त्री के मन को लुभाने में कामयाब होगी। कुलमिलाकर सारी कहानियां एक ना एक संदेश लिए हुए हैं।

संपादन और बेहतर हो सकता था। कहीं-कहीं कुछ विस्तारों से बचा जा सकता था। पुस्तक - फोटोफ्रेम में कैद हंसी लेखक- सुमन बाजपेयी प्रकाशक - फ्लायड्रीम्स पब्लिकेशंस कीमत- 160 रुपए