Rice Price: भारत में चावल के दाम हुए महंगे, जानिए क्या है खास वजह

गेहूं की बढ़ती कीमतों और घटते आयात के कारण बांग्लादेश में आटे की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। चावल की खपत बढ़ी है, लेकिन बाढ़, तूफान और भारी बारिश ने के कारण चावल की पैदावार में बाधा आई है।

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Newz Fast,New Delhi ऐसे में चावल की कीमतों में और अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में भारतीय चावल की कीमतों में पिछले पांच दिनों में 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। पढ़िए रिपोर्ट

क्या चावल पर भी लगाम लगाएगा भारत ?
विगत 22 जून को, बांग्लादेश में एक अधिसूचना जारी हुई। इसमें 31 अक्टूबर तक गैर-बासमती चावल के आयात की अनुमति दी गई।

जानकारों की मानें तो ये पहली बार है जब बांग्लादेश ने भारत से चावल का आयात इतनी जल्दी शुरू कर दिया है। इस बात की आशंका है कि भारत चावल निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा सकता है।


बांग्लादेश में महंगाई, भारत पर नजरें !
बांग्लादेश ने आयात शुल्क और चावल पर टैरिफ को 62.5 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से भारतीय व्यापारी और निर्यातकों को झटका लगा है।

बांग्लादेश में चावल की खपत और भारत के निर्यात के मद्देनजर पड़ोसी राष्ट्र के साथ भारत के व्यवहार पर सबकी नजरें टिकी हैं।

धान की फसल बर्बाद, चावल महंगा
बता दें कि आमतौर पर बांग्लादेश चावल का आयात सितंबर-अक्टूबर में शुरू करता है। बांग्लादेश में अनाज की कमी की खबरें सामने आई हैं।

अनाज कमी का कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध है। इन्हीं कारणों से बांग्लादेश में गेहूं आयात में गिरावट आई है। बाढ़ के कारण इस साल देश में चावल की खेती को भी नुकसान हुआ है।


वैश्विक बाजार में चावल महंगा
बांग्लादेश में चावल की डिमांड के संबंध में इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश के चावल निर्यातकों के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव ने कहा,

"पिछले पांच दिनों में, भारतीय गैर-बासमती चावल की कीमतें वैश्विक बाजारों में 350 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 360 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। संगठन के मुताबिक बांग्लादेश में 22 जून की अधिसूचना सामने आने के बाद ऐसा हुआ है।"


चावल उत्पादन : पश्चिम बंगाल और यूपी-बिहार की भूमिका
गेहूं की बढ़ती कीमतों और चावल की पैदावार में कमी के कारण कीमतों में और अस्थिरता की आशंका है। इस संबंध में तिरुपति एग्री ट्रेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरज अग्रवाल ने बताया, चावल की कीमतें पहले ही 10 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं और अभी भी बढ़ रही हैं।

बांग्लादेश आमतौर पर पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार से चावल खरीदता है। इन तीन राज्यों में कीमतों में तेजी आई है।

चावल की सामान्य किस्म की कीमतों में भी 20 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है। इन तीन राज्यों में कीमतें बढ़ने के कारण अन्य क्षेत्रों में भी चावल की कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। चावल की कीमतें 10 प्रतिशत तक बढ़ी हैं।


चावल के मार्केट में भारत, बांग्लादेश, चीन
बता दें कि वित्त वर्ष 2011 में बांग्लादेश ने 13.59 लाख टन चावल का आयात किया था। ऐसे में माना जा रहा है कि बांग्लादेश द्वारा गैर-बासमती चावल की जल्दी खरीद से भारतीय चावल के निर्यात को नई गति मिलेगी।

वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2021 में 4.8 बिलियन अमरीकी डालर की तुलना में 2021-22 में 6.11 बिलियन अमरीकी डालर के गैर-बासमती चावल का निर्यात किया था।

बता दें कि चीन के बाद दुनिया के सबसे बड़े चावल उपभोक्ता भारत की वैश्विक चावल व्यापार में 40% से अधिक की बाजार हिस्सेदारी है।