रेप केस के आरोपी बसपा सांसद अतुल राय को मिली राहत, जेल से छुटे, जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश ममें बसपा सांसद अतुल राय को रेप केस में बड़ी राहत मिली है. वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट ने आज यानी शनिवार को बसपा सांसद अतुल राय को बरी कर दिया. अतुल राय पर रेप का आरोप था.
एएनआई
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Newz Fast,UP  उत्तर प्रदेश के घोसी से बसपा सांसद अतुल राय (Atul Rai) को रेप केस में बड़ी राहत मिली है. वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट ने आज यानी शनिवार को बसपा सांसद अतुल राय को बरी कर दिया.

अतुल राय पर रेप का आरोप था. वह पिछले तीन साल से प्रयागराज के नैनी जेल में बंद हैं. बता दें कि यह घटना लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 2018 के मार्च महीने की है, जब वाराणसी के ही मंडुआडीह थाना क्षेत्र में अतुल राय के दफ्तर में एक युवती के साथ रेप किया गया था.

क्या है मामला

दरअसल, बीते लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 1 मई 2019 को एक युवती ने लंका थाने में अतुल राय के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था.

22 जून 2019 को सांसद अतुल राय ने वाराणसी की कोर्ट में सरेंडर कर दिया था. इस मामले में अतुल राय प्रयागराज जिले के केंद्रीय कारागार नैनी में बंद हैं.

युवती और उसके दोस्त ने फेसबुक लाइव के जरिए आरोप लगाया था कि सभी मिलकर उसे ही चरित्रहीन साबित और सांसद अतुल राय को बचाने की कोशिश में लगे हैं.

इसके बाद युवती ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के सामने खुद को आग लगा लिया था. युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

कहां की थी पीड़िता

पीड़ित लड़की उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली थी और वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज की छात्रा थी. आत्मदाह से ठीक पहले युवती और उसके दोस्त ने फेसबुक लाइव करते हुए यूपी के कई पुलिस अफसरों समेत कुछ अन्य लोगों पर परेशान करने और दबाव बनाने का आरोप लगाया था.

वीडियो के जरिए लड़की और उसके दोस्त ने तत्कालीन वाराणसी एसएसपी रहे अमित पाठक, तत्कालीन सीओ भेलुपुर अमरेश सिंह बघेल, दरोगा संजय राय समेत अन्य पर भी सांसद को बचाने और उसे परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया था.

इन अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई

आत्मदाह की घटना से पहले 2 अगस्त को मृतक युवती के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था. युवती पर आरोप था कि उसने दो अलग-अलग मुकदमों में अपनी उम्र अलग-अलग दर्ज कराई है.

वहीं, इस मामले में वाराणसी के तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक को गाजियाबाद से हटाकर लखनऊ तबादला कर दिया गया था. प्रभारी निरीक्षक को लाइन हाजिर कर दिया गया, जबकि विवेचक को सस्पेंड कर दिया गया था.