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मदर्स डे पर मां को बेटे ने किडनी ‘गिफ्ट’ कर बचाई जान, सफल हुई ट्रांसप्लांट, महिला की फेल हो चुकी थी किडनी

दिल्ली में एक बेटे ने मदर्स डे के दिन अपनी मां को एक अनमोल तोहफा दिया। 25 साल के अभिनव मुखर्जी ने अपनी मां को किडनी डोनेट कर उनकी जान बचा ली।
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mothar,sday k din dete n ki maa ko kideny donet

Newz Fast, New Delhi  अभिनव ने कहा कि वह केवल अपनी मां की जान बचाना चाहते थे।अभिनव मुखर्जी ने मां को अपनी किडनी डोनेट कर बचाईजानडॉक्टर ने कहा कि इस मामले में एक अविवाहित बेटे से मां को किडनी मलना बहुत ही रेयर मामला है

देश में लाइव डोनेशन में हमेशा लड़कियां या महिलाएं ही आगे रहती हैं

बहुत कम युवा बेटे अपने माता पिता की जान बचाने के लिए अपना अंग दान करने सामने आते हैंनई दिल्ली: 25 साल के बेटे ने अपनी मां की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी।

किडनी फेल की वजह से मां की स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी,

वह अपना रोज का काम भी नहीं कर पाती थीं। किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney Transplant in Delhi) ही एकमात्र इलाज था। ऐसे में बेटे ने किडनी डोनेट कर अपनी मां की जान बचा ली।

मदर्स डे (Mother's Day) पर एक मां के लिए इससे बेहतर तोहफा और क्या हो सकता है, जिस बच्चे को उसने जन्म दिया, उस बच्चे ने उसकी जान बचाई।

आकाश हॉस्पिटल में 45 साल की महिला पिया मुखर्जी (Pia Mukherjee) का इलाज चल रहा था। यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ विकास अग्रवाल (Dr Vikas Agarwal) ने बताया कि महिला को कुछ दिनों से पांव में दर्द हो रहा था।

थकान होती थी और वजन कम हो रहा था। दवा भी चली लेकिन उसकी परेशानी कम नहीं हुई। यहां जांच के बाद पाया गया कि महिला की किडनी फेल हो गई है और अंतिम स्टेज में है।

मां की यह स्थिति देख कर उनका बेटा ही किडनी डोनेट के लिए आगे आया। डॉक्टर ने कहा कि इस मामले में एक अविवाहित बेटे से मां को किडनी मलना बहुत ही रेयर मामला है।

बेटे से किडनी मिलने के बाद मां ने कहा कि मैं पेशे से एक डांसर हूं

और किडनी फेल होने की वजह से मेरे डांस के दिन वापस आने की उम्मीद खत्म हो गई थी। एक मां होने के नाते, मेरे लिए अपने बेटे से किडनी प्राप्त करना आसान निर्णय नहीं था, लेकिन वह किडनी डोनेट करने के बारे में बहुत साफ था।

उसने सभी विचारों को खारिज कर दिया, क्योंकि वह मेरी जान बचाना चाहता था, मेरी जान बचाना उसकी प्राथमिकता थी। बेटे अभिनव मुखर्जी (Abhinav Mukherjee) ने कहा कि मेरी मां की जान बचाने से ज्यादा मेरे लिए कुछ महत्वपूर्ण नहीं था।

देश में लाइव डोनेशन में हमेशा लड़कियां या महिलाएं ही आगे रहती हैं। लगभग 75 पर्सेंट डोनर महिलाएं ही होती हैं। बहुत कम युवा बेटे अपने माता पिता की जान बचाने के लिए अपना अंग दान करने सामने आते हैं।

वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि देश में लाइव डोनेशन में हमेशा लड़कियां या महिलाएं ही आगे रहती हैं। लगभग 75 पर्सेंट डोनर महिलाएं ही होती हैं। बहुत कम युवा बेटे अपने माता पिता की जान बचाने के लिए अपना अंग दान करने सामने आते हैं।