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ससुराल में नहीं सिर्फ मायके में ही मीरा राजपूत को मिलती है ये खास चीज, आप भी सुनकर करेंगे रिलेट

मीरा राजपूत ने एक पोस्ट किया है, जिसमें बताया है कि पैरेंट्स का घर जैसी जगह कहीं नहीं होती। उन्होंने जो कहा है उससे ज्यादातर मैरिड विमन्स रिलेट करेंगी।
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Newz Fast , New Delhi मीरा राजपूत उन स्टार वाइफ्स में से हैं, जिन्होंने बिना बॉलीवुड में एंट्री किए ही फैंस के बीच खास पहचान बनाई है। मीरा और शाहिद कपूर की स्ट्रॉन्ग बॉन्डिंग और उनकी क्यूट फैमिली को फैंस बेहद पसंद करते हैं।

नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से आने के बाद भी मीरा ने अपनी मैरिड लाइफ को बहुत अच्छे से बैलेंस किया है, जिसका खुलासा खुद उनके पति शाहिद भी कर चुके हैं।

हाल ही में मीरा ने एक ऐसी बात कही है, जिससे लड़कियां जरूर रिलेट करेंगी। शादी के बाद महिलाओं के जीवन में कई बदलाव आते हैं और इसे मीरा भी फील करती हैं।

वह न सिर्फ पूरा घर मैनेज करती हैं बल्कि शाहिद के शूटिंग सेट पर रहने के टाइम बच्चों को भी पूरी तरह से संभालती हैं। हालांकि इन दिनों मीरा अपना मी-टाइम इंजॉए कर रही हैं और उन्होंने बताया कि ससुराल से मायके कितना अलग होता है। 

'माता-पिता के घर जैसी नहीं कोई जगह'

मीरा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि मायके में सुकून मिलता है, वह ससुराल में नहीं मिल सकता है।

उन्होंने अपने फेवरेट पिल्लो की तस्वीर शेयर की है, जिसके साथ लिखा- 'माता-पिता का घर ही सिर्फ एक ऐसी जगह है कि जहां नींद लंबी होती है यानी कि आप चैन की नींद सो सकते हैं और आपसे किसी काम की उम्मीद भी नहीं की जाती।'

मीरा ने जो कहा और महसूस किया, ऐसा मानने वाली वह अकेली नहीं हैं बल्कि ज्यादातर मैरिड विमन्स ऐसा मानती हैं। वह इस बात पर बिल्कुल सहमति जताती हैं कि उन्हें मायके में जिस तरह का आराम मिलता है, वह ससुराल में कभी नहीं मिल सकता।

​मां से कुछ भी कहने में नहीं होती झिझक

ससुराल भले ही कितना भी अच्छा क्यों न हो, लेकिन अपने सास-ससुर के सामने बहू को एक झिझक हमेशा रहती है। हालांकि मायके में आप इससे बिल्कुल उलट एकदम बिंदास, बिना डरे रहती हैं।

मां के सामने कुछ भी कहने के लिए बेटियों को सोचने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि पूरे हक के साथ वह उनके सामने अपनी डिमांड रख देती हैं।

यही कारण है कि अपने मायके में लड़कियां चैन की नींद सो पाती हैं, जिसे कोई डिस्टर्ब करने वाला नहीं होता। अपनी बेटी को आराम से सोते देख पैरेंट्स के चेहरे पर भी एक मीठी सी मुस्कान आ जाती है।

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​जिम्मेदारी से रहते हैं फ्री

इस बात में कोई दोराय नहीं है कि आप भले ही वर्किंग मैरिड विमन हों, लेकिन घर की जिम्मेदारी भी आपको बखूबी निभानी पड़ती है। सास-ससुर को खाना देना,

बच्चों को संभालना और पति की चीजों को भी मैनेज करना जैसे कई काम शादीशुदा महिलाओं को देखने पड़ते हैं। ऐसे में जब वह मायके जाती हैं, तो वहां हर जिम्मेदारी से फ्री रहती हैं।

अपने घर में आपको मां अपने हाथों से खाना बनाकर खिलाती है और कुछ भी काम करने पर रोककर आराम करने को कहती है।

​अपने घर में जज करने वाला कोई नहीं होता

अपने घर में आप भले दस बजे भी सोकर उठे, लेकिन फिर भी आपको कोई जज नहीं करता। वहीं अगर ऐसा आपने ससुराल में कर दिया, तो एक बहू पर तानों की बरसात होने लगती है।

उसे देर तक सोने के कारण तरह-तरह की बातें सुनाई जाती हैं और अच्छी-बुरी बहू की कैटेगरी में डाल दिया जाता है।

यही कारण है कि अपने घर पहुंचते ही लड़कियां एकदम स्ट्रेस फ्री हो जाती हैं और अपने भाई-बहनों को ऑर्डर देना शुरू कर देती हैं। एक मां अपनी बेटी के दुख-दर्द जितनी बखूबी समझती है, शायद ही कोई सास उसे समझ पाए।

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​ससुराल में भी कराएं मायके जैसा फील

पहले के मुकाबले अब वक्त फिर भी बदल रहा है, वर्किंग महिलाओं को अपनी सास का किचन में सपोर्ट मिलने लगा है। वह समझती भी हैं कि काम के साथ पूरे घर को मैनेज कर पाना आसान नहीं होता है।

लेकिन फिर भी मायके जैसा फील एक बहू को अब भी नहीं मिल पाता।

अपनी बहू को घर जैसी फीलिंग देने के लिए उसे जज करना बंद कर दें। अगर वह देर तक सो रही है, तो इस बात पर यकीन करें कि जरूर वह थकी होगी।

वहीं उस पर अलग से काम का प्रेशर डालने के बजाय उसकी मां जैसी दोस्त बनने का प्रयास करें, जो आपके रिश्ते को स्मूद बनाने में मदद करेगा।