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साइबर की दुनिया में इतिहास रचने वाली Kamakshi Sharma के बारे में जानिए, जिन पर बनेगी फिल्म

Kamakshi Sharma  आपको बता दें कि खास बात यह है कि जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 30 से अधिक शहरों में कामाक्षी शर्मा विभिन्न राज्यों में तैनात आइपीएस अफसरों और 35 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम की ट्रेनिंग दे चुकी हैं।
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Newz Fast, New Delhi    यह सब जानते हैं कि साइबर अपराध की रोकथाम और लोगों को जागरूक करने के लिए गाजियाबाद की बेटी कामाक्षी शर्मा का दुनिया भर में नाम है।

 उनकी खासियत यह है कि बिना किसी पद पर रहते हुए वर्ष 2019 कामाक्षी ने जम्मू से कन्याकुमारी तक 50 हजार पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रशिक्षण दिया।

एक माह तक जम्मू से कन्याकुमारी तक कई आइपीएस समेत पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण देने वाले कारनामें और पांच हजार से अधिक साइबर अपराध के मामलों को हल करने वाली कामाक्षी का नाम वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड में दर्ज किया गया था।

 आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले उनका नाम इंडिया बुक आफ रिकार्ड और एशिया बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज किया जा चुका है।

 बताया जा रहा है कि अब उनके जीवनकाल पर सोहम राक स्टार एंटरटेनमेंट की धाकड़, मुल्क, अपने-2, शादी में जरूर आना और सनम तेरी कसम फिल्म बनाने वाले निर्माता दीपक मुकुट ने फिल्म बनाने की तैयारी की है।

मुंबई कामाक्षी को बुलाकर उनकी बायोपिक के लिए हस्ताक्षर कराए गए हैं। उनकी जीवनी पर बनने वाली फिल्म में उनकी भूमिका कोई बड़ी एक्ट्रेस निभाएंगी।

मध्यमवर्गीय परिवार से इस मुकाम तक पहुंचने के लिए तमाम उतार-चढ़ाव और साइबर अपराध की रोकथाम तक का हर पहलू होगा।

 बता दें कि कामाक्षी के अनुसार फिल्म निर्माता इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज कराएंगे। ताकि, साइबर अपराध की रोकथाम में भारत का नाम विश्व पटल पर चमके। 

बता दें कि मूलरूप से मेरठ के बुढ़ाना गेट की रहने वाली कामाक्षी शर्मा इन दिनों परिवार के साथ पुरानी पंचवटी में रहती हैं। उनके पिता रघु शर्मा दिल्ली की एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर हैं।

गाजियाबाद से की है पढ़ाई

 उनकी सिक्षा की बात करें तो कामाक्षी ने 10वीं व 12वीं की पढ़ाई गाजियाबाद के निजी स्कूलों से की। इसके बाद बीटेक गढ़वाल यूनिवर्सिटी से किया।

यहां पढ़ाई के दौरान उन्होंने इथिकल हैकिंग की परीक्षा पास की थी, जिसके बाद से वह लगातार साइबर क्राइम पर काम करती रहीं।

 खास बात यह है कि गृह मंत्रालय से उन्हें नेशनल पुलिस ग्रुप नाम का एक मिशन मिला, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 30 से अधिक शहरों में उन्होंने विभिन्न राज्यों में तैनात आइपीएस अफसरों और 35 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम की ट्रेनिंग दी।

इसका मकसद पुलिस द्वारा साइबर क्राइम पर लगाम लगाना था।


देश को साइबर एक्सपर्ट बनाना मेरा लक्ष्य

 आपको बता दें कि कामाक्षी शर्मा का कहना है कि अब तक हम अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी समेत कई देशों को साइबर एक्सपर्ट के तौर पर जानते हैं, लेकिन भारत भी दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपर्ट बन सकता है।

हमारे देश में बहुत तेजी से लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे होने वाले साइबर क्राइम से बचने की ललक उनके अंदर है। जागरूकता के बाद साइबर ठगी से बचा जा सकता है।