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बेटियां होने पर पति ने घर से निकाला..अब बस चलाकर समाज को आईना दिखाना चाहती हैं लक्ष्मी

लड़कियां होने पर महिलाओं को अपने ससुराल में किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसकी जीता जागता उदाहरण हैं लक्ष्मी। दो बेटियां होने पर पति ने उन्हें घर से निकाल दिया।
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bus chlane ki traning

Newz Fast, New Delhi   अब वह बस ड्राइविंग की ट्रेनिंग ले रही हैं।बस चलाने की ट्रेनिंग ले रही हैं लक्ष्मी दिल्ली की एक मां लक्ष्मी की दर्द भरी कहानी, पति ने दो बेटी होने घर से निकाला
बुराड़ी के ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में लक्ष्मी हैवी वीकल की ले रही हैं ट्रेनिंग

लक्ष्मी ने कहा कि समाज को दिखाना चाहती हूं आईना

राजेश पोद्दार, नई दिल्ली: मैं एक लड़की हूं लड़की बनकर ही रहना है। लड़का बनकर ड्राइविंग नहीं करना। मेरे माता-पिता की सात संतानों में सभी लड़कियां ही है।

मैं चौथे नंबर की थी, इस समाज में लड़कियों की ऐसी दुर्दशा है कि मुझसे शादी करके अपने घर ले जाने वाला शख्स, मेरी दो बेटियां होने पर रात को 2 बजे घर से मारपीट कर भगा देता है।

उस वक्त मुझे बेटी होने पर अभिशाप महसूस होने लगा,

लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने यह ठाना कि इस समाज में अपने नजरिए से जीना है। बेटियां भी कुछ कर सकती हैं यह आईना समाज को दिखाना होगा। यह कहना है हैवी मोटर वीकल चलाने की ट्रेनिंग ले रहीं लक्ष्मी का।

बुराड़ी के ड्राइवर ट्रेनिंग इस्टीट्यूट में इस समय लक्ष्मी हैवी मोटर वीकल की ट्रेनिंग के आखिरी दौर में हैं। वह एक हाथ से बस की स्टीयरिंग संभालते हुए, तो दूसरा हाथ गियर पर रख बस में रफ्तार देती नजर आती हैं।

कुछ दिनों में दिल्ली की सड़कों पर बस या ट्रक चलाते आपको भी लक्ष्मी दिकें तो हैरान मत हो जाइएगा। लक्ष्मी कहती हैं कि मैं बेहतर ड्राइवर बन सकूं, इसके लिए एक महीने से यहां ट्रेनिंग ले रहा हूं।

अब सिर्फ एक टेस्ट बाकी है। इसके बाद मैं बस और ट्रक चला सकती हूं। मैं एक साल से दिल्ली में टैक्सी चला रही हूं। जब ट्रेनिंग होती है तो मैं सुबह के 3-4 बजे तक टैक्सी चलाती हूं।

उस वक्त मुझे बेटी होने पर अभिशाप महसूस होने लगा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने यह ठाना कि इस समाज में अपने नजरिए से जीना है। बेटियां भी कुछ कर सकती हैं यह आईना समाज को दिखाना होगा।

ट्रेनिंग ले रही हैं लक्ष्मी

'ससुराल वाले ने रात 2 बजे मारपीट कर घर से निकाला'

लक्ष्मी कहती हैं, 'मेरे मां-बाप को एक बेटा चाहिए था, जो नहीं मिला। बल्कि भगवान ने उन्हें 7 बेटियां दे दीं। 8वीं क्लास तक पढ़ाई के बाद शादी हो गई।

शादी के बाद पति और मेरे ससुराल वालों ने मेरी पहली बेटी होने के बाद से ही मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी थी। मेरी दूसरी संतान भी बेटी ही थी। इस पर मेरे ससुरालवालों ने मुझे रात को 2 बजे मारपीट कर बाहर निकाल दिया।

तब मैंने ठाना कि परिवार और समाज को आईना दिखाऊंगी और बताऊंगी कि बेटियां खुद के बलबूते भी बहुत कुछ कर सकती है।

घर का खर्चा चलाने के लिए बर्तन तक धोए
लक्ष्मी कहती हैं कि उन्होंने यहां तक को सफल को तय करने के लिए घरों में बर्तन तक धोए हैं। इससे घर का खर्चा तो चल जाता था लेकिन मेरे परिवार या समाज में कोई परिवर्तन नहीं आ सकता था। इसके लिए मैंने ड्राइविंग शुरू की।