इस राज्य में बाढ़ से बूरे हाल, लोगों को हो रही है काफी परेशानी

गंडक नदी का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की परेशानी कम नहीं हो रही. घरों में पानी घुसने के बाद मचान (यानी चचरी) पर कई परिवारों की जिंदगी कट रही है.
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Newz Fast,Bihar चापाकल और सरकारी नल डूब जाने के बाद पीने के लिए पानी की परेशानी सबसे ज्यादा है. पूरे जिले की बात करें तो सारण तटबंध के अंदर बसे 6 प्रखंड के 26 टोले और गांव हैं, जहां बाढ़ के पानी से लोग परेशान हैं. 

 तस्वीर सदर प्रखंड के राजवाही गांव की है जहां झोपड़ीनुमा घर गंडक नदी के पानी मे डूब चुका है. इन इलाकों के लोग गोपालगंज-बेतिया सड़क के किनारे तंबू तानकर शरण लिए हैं. यहां खाने-पीने के लिए कोई सामग्री भी नहीं मिल पा रही है.
तस्वीर सदर प्रखंड के राजवाही गांव की है जहां झोपड़ीनुमा घर गंडक नदी के पानी मे डूब चुका है. इन इलाकों के लोग गोपालगंज-बेतिया सड़क के किनारे तंबू तानकर शरण लिए हैं. यहां खाने-पीने के लिए कोई सामग्री भी नहीं मिल पा रही है. 

 सरकार हमारी नहीं सुनती, अधिकारी गांव में आते नहीं हैं, किसे सुनाए अपनी परेशानी : सदर प्रखंड के जादोपुर-मंगलपुर पुल के पास बच्चों के साथ शरण लेकर बैठी लालझरी कहती हैं कि सरकार हमारी नहीं सुनती. अधिकारी गांव में आते नहीं हैं. आएंगे नहीं तो उन्हे कैसे पता चलेगा हमारी परेशानी.

सरकार हमारी नहीं सुनती, अधिकारी गांव में आते नहीं हैं, किसे सुनाए अपनी परेशानी : सदर प्रखंड के जादोपुर-मंगलपुर पुल के पास बच्चों के साथ शरण लेकर बैठी लालझरी कहती हैं कि सरकार हमारी नहीं सुनती. अधिकारी गांव में आते नहीं हैं. आएंगे नहीं तो उन्हे कैसे पता चलेगा हमारी परेशानी. से ज्यादा परिवार हैं, जिनके घर बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं और ये सभी लोग उंचे स्थानों पर निकलकर सड़क किनारे शरण लिए हुए हैं.

गम्हरिया गांव में सिर्फ लालझरी देवी का दर्द नहीं है, इनके तरह यहां दो दर्जन से ज्यादा परिवार हैं, जिनके घर बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं और ये सभी लोग उंचे स्थानों पर निकलकर सड़क किनारे शरण लिए हुए हैं. फोटो - चचरी पर शरण लिए गम्हरिया गांव के बच्चे

यहां के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पिछली बार बाढ़ आई तो इन इलाकों में कम्युनिटी किचेन प्रशासन के द्वारा खोला गया था, जिससे खाने-पीने को लेकर कोई परेशानी नहीं थी, इस बार ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है. फोटो-  राजवाही गांव में पानी से घिरे गांव व डूबे चापाकल

यहां के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पिछली बार बाढ़ आई तो इन इलाकों में कम्युनिटी किचेन प्रशासन के द्वारा खोला गया था, जिससे खाने-पीने को लेकर कोई परेशानी नहीं थी, इस बार ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है. फोटो-  राजवाही गांव में पानी से घिरे गांव व डूबे चापाकल

नल सूखा, चापाकल डूबा, बाढ़ का पानी पीने को मजबूर : राजवाही गांव की रहनेवाली चनरी देवी का झोपड़ीनुमा घर गंडक नदी के पानी में डूब चुका है.

चनरी अपने परिवार के साथ तटबंध के किनारे रहती है. महिला ने बताया कि गांव में सरकारी नल लगा है, लेकिन सूख चुका है.
नल सूखा, चापाकल डूबा, बाढ़ का पानी पीने को मजबूर : राजवाही गांव की रहनेवाली चनरी देवी का झोपड़ीनुमा घर गंडक नदी के पानी में डूब चुका है.

चनरी अपने परिवार के साथ तटबंध के किनारे रहती है. महिला ने बताया कि गांव में सरकारी नल लगा है, लेकिन सूख चुका है.

 चापाकल लगाये गए हैं, जो बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं. पीने के लिए बाहर से पानी लाते हैं, कई बार बाढ़ का पानी ही पीना मजबूरी बन जाता है. यही हाल है यहां के नारायण यादव का. इनके तरह यहां 20 से ज्यादा परिवार है, जो बाढ़ के हालात से परेशान हैं. 


चापाकल लगाये गए हैं, जो बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं. पीने के लिए बाहर से पानी लाते हैं, कई बार बाढ़ का पानी ही पीना मजबूरी बन जाता है. यही हाल है यहां के नारायण यादव का. इनके तरह यहां 20 से ज्यादा परिवार है, जो बाढ़ के हालात से परेशान हैं. 

 ज्ञांति ने जान जोखिम में डाल घरों का सामान बचाया : राजवाही और गम्हरिया गांव के बीच ज्ञांति कुमारी अपने माता-पिता के साथ रहती है. अचानक गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा और ज्ञांति कुमारी का घर डूब गया. झोपड़ीनुमा घर में अनाज डूबकर खराब हो गया.


ज्ञांति ने जान जोखिम में डाल घरों का सामान बचाया : राजवाही और गम्हरिया गांव के बीच ज्ञांति कुमारी अपने माता-पिता के साथ रहती है. अचानक गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा और ज्ञांति कुमारी का घर डूब गया. झोपड़ीनुमा घर में अनाज डूबकर खराब हो गया. 

मवेशियों को किसी तरह से बाहर निकाल दिया गया, लेकिन खाने-पीने का जो सामान घर पर था, वह बर्बाद हो गया.

अब मां-बाप के साथ मंगलपुर पुल के किनारे रहने को मजबूर है. यहां खाने-पीने के लिए कोई सामग्री भी नहीं मिल पा रही. ज्ञांति ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी पीने के पानी को लेकर है. फोटो-  गम्हरिया में मवेशियों के बथान में घुसा गंडक का पानी

मवेशियों को किसी तरह से बाहर निकाल दिया गया, लेकिन खाने-पीने का जो सामान घर पर था, वह बर्बाद हो गया. अब मां-बाप के साथ मंगलपुर पुल के किनारे रहने को मजबूर है. यहां खाने-पीने के लिए कोई सामग्री भी नहीं मिल पा रही. ज्ञांति ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी पीने के पानी को लेकर है. 


 गम्हरिया में दो दर्जन से ज्यादा परिवारों का घर डूबा : गंडक नदी के उत्तर दिशा में बसा गम्हरिया गांव बाढ़ के पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित है. यहां पंचायत भवन से लेकर सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी और दो दर्जन से ज्यादा घर डूब चुके हैं. नदी के निचले इलाके में बसे इस गांव के ग्रामीण सबसे ज्यादा परेशान हैं. 

गम्हरिया में दो दर्जन से ज्यादा परिवारों का घर डूबा : गंडक नदी के उत्तर दिशा में बसा गम्हरिया गांव बाढ़ के पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित है. यहां पंचायत भवन से लेकर सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी और दो दर्जन से ज्यादा घर डूब चुके हैं. नदी के निचले इलाके में बसे इस गांव के ग्रामीण सबसे ज्यादा परेशान हैं. 

गम्हरिया गांव की श्रीकांति देवी, ज्ञांति देवी, दुलारो देवी ने बताया कि घरों में पानी घुस चुका है और आसमान से बारिश बरस रही है.

दिन हो या रात, बच्चे और महिलाएं सड़क किनारे शरण लिए हैं. जिंदगी इन परिवारों की चचरी पर ही कट रही है. फोटो-बाढ़ का पानी घटने का इंतजार करता हुआ ग्रामीण


गम्हरिया गांव की श्रीकांति देवी, ज्ञांति देवी, दुलारो देवी ने बताया कि घरों में पानी घुस चुका है और आसमान से बारिश बरस रही है. दिन हो या रात, बच्चे और महिलाएं सड़क किनारे शरण लिए हैं. जिंदगी इन परिवारों की चचरी पर ही कट रही है. फोटो-बाढ़ का पानी घटने का इंतजार करता हुआ ग्रामीण