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दो साल का होने के बाद भी अगर बच्चा बोतल से दूध पीता है तो उसकी ये आदत समय रहते छुड़वा दीजिए

तीन साल के दिव्यांश की मम्मी ने महसूस किया कि उनका बेटा रबर की हर चीज़ अपने मुंह में लेकर चबाने लगा है।
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Newz Fast, New Delhi  उन्होंने इसके लिए जब डॉक्टर से परामर्श लिया तो पता चला कि बच्चा जब बोतल से दूध पीना बंद करेगा तभी यह समस्या दूर हो सकेगी।
समय पर दूध न छोड़ पाने के कारण बच्चों में होती हैं ये समस्याएं-
वज़न न बढ़ना —
बोतल से दूध पीने के कारण बच्चे का उचित विकास नहीं हो पाता। आहार में आयरन कम होना, खून की कमी रहना, वज़न कम होना जैसी शिकायत आती हैं।

बच्चे को दूध के माध्यम से पूरा आहार नहीं मिलता, जिसकी वजह से कब्ज़ रहता है तो कई दफ़ा मल में खून भी आने लगता है।
ठीक से खाना न खाना —
बच्चों को बोतल की आदत होती है। निप्पल चूसने के कारण उन्हें चबाने की आदत नहीं पड़ती। इसलिए वह खाना खाने में परेशान करते हैं। 

जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है, यह दिक़्क़त भी बढ़ती है। इसलिए मांएं शिकायत भी करती हैं कि बच्चा ठीक से खाता नहीं है।
दांत खराब होना —
जब बच्चे के 8-10 दांत आ जाते हैं, तो बोतल के निप्पल रगड़ने से दांतों की लाइनिंग खराब होने लगती है। साथ ही दूध चिपकने से दांतों में कीड़े लगनेे की आशंका रहती है।
बोतल के विकल्प-

बच्चे को चम्मच, कटोरी, पलाड़े (दूध पिलाने का उपकरण) या कप की मदद से भी दूध पिला सकते हैं।
बोतल छुड़ाने के लिए अपनाएं ये तरीक़े

बच्चा रात में दूध की बोतल की ज़िद कर रहा है, तो उसे बोतल देने के बजाय कंधे पर उसका सिर रखकर (शोल्डर होल्ड पोजीशन) थपकी देते हुए सुलाएं।

आप टहलते हुए भी बच्चे को सुला सकते हैं, इससे उन्हें आसानी से नींद आ जाती है। }बोतल छुड़वाने का बेहतरीन विकल्प सिपर कप होते हैं। इसमें से दूध गिरता भी नहीं है और बच्चों को आसानी से इसकी आदत भी हो जाती है।

बच्चे सिपर कप को दोनों तरफ़ से पकड़ भी सकते हैं। }बच्चे को बोतल में जब भी दूध दें तो उसे पतला रखें और कप में गाढ़ा दें। दूध को स्वादिष्ट (बच्चों के लिए आने वाले विशेष पाउडर जो स्वास्थ्यवर्धक भी होते हैं) बनाकर दें।

इससे धीरे-धीरे बच्चे को समझ में आने लगेगा कि कप का दूध अधिक स्वादिष्ट है और वो बोतल की जगह कप से दूध पीना शुरू कर देगा। कार्टून बने, रंग-बिरंगे कप बच्चों को आकर्षित करते हैं,

उनका इस्तेमाल करें। }बोतल बच्चे की नज़र के सामने न रहे, इसका ख़्याल रखें।