चरखी दादरी हरियाणा

National Medalist Dyakishan Ahlawat : नेशनल खेल में मेडल जीतने वाला खिलाड़ी अब सब्जी मंडी में बेच रहा सब्जियां, जानिये ये बड़ी वजह

daya singh ahlawat

Newz Fast, Charkhi Dadri

National Medalist Dyakishan Ahlawat

स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और फिर नेशनल खेलों में मेडल जीतने के बावजूद एक अभागा युवा सब्जी मंडी में मासाखोर बन सब्जी बेच रहा है। परिवार की हालत अच्छी नहीं होने के कारण खेलों के दौरान भी कुछ आगे नहीं बढ़ पाया।

खेलों को छोड़ कर नौकरी की तलाश में जुट गया, वहां भी निराशा ही हाथ लगी। 6-7 साल सरकारी नौकरी तो क्या डीसी रेट की नौकरी के लिए दौड़ धूप करने बाद आखिरकार सब्जी मंडी में सब्जी बेचने को मजबूर हो गया।

हो भी क्यों ना। घर और चूल्हा भी चलाना है। सरकार की नई खेल नीति आने के बाद दयाकिशन के प्रमाण पत्रों का ग्रेडेशन भी नहीं हो पा रहा है।  National Medalist Dyakishan Ahlawat

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हरियाणा के चरखी दादरी में प्रेम नगर निवासी 34 साल के युवक दयाकिशन अहलावत ने अपने स्कूली और कॉलेज के समय में एथलेटिक्स में अच्छे हाथ आजमाए और कामयाबी भी मिली।

लेकिन सुविधाओं के अभाव में वह कुछ खास आगे नहीं बढ़ पाया। पांच साल के दौरान भिवानी साईं के हॉस्टल में रहकर प्रेक्टिस की। यूनिवर्सिटी और नेशनल के इंटर जोनल यूथ खेलों में पदक तक जीते।

2002 के यमुनानगर में हुई खेलों में उन्होंने बेस्ट एथलीट का खिताब भी जीता। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। National Medalist Dyakishan Ahlawat

एक बीगा जमीन में उगाता रहा है सब्जी :

दयाकिशन दिल्ली बाइपास पर अपनी एक बीगा जमीन में सब्जी लगाने का कार्य करने लगा। सब्जियों को तोड़कर वह हर रोज सब्जी में आढ़तियों को बेचकर आता था। National Medalist Dyakishan Ahlawat

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हालांकि सब्जी से कुछ खास कमाई नहीं हो पा रही थी, लेकिन घर का चूल्हा जरूर जलता था। इस बार उसने पालक लगाई हुई थी। बारिश के कारण जमीन में जलभराव अधिक हो गया तो पालक खराब हो गई।

नासमझी के कारण नहीं करवा पाया ग्रेडेशन

जिस समय दयाकिशन अपने खेलों में मस्त था। अनेक प्रकार के प्रमाण पत्र उसको हासिल हो चुके थे। बस नासमझी के कारण उस समय ग्रेडेशन सर्टिफिकेट तैयार नहीं करवा पाया। National Medalist Dyakishan Ahlawat

National Medalist Dyakishan Ahlawat

इसके बाद 2018-19 में सरकार ने खेल नीति में बदलाव करते हुए ग्रेडेशन की पॉलिसी भी चेंज कर दी। इस पाॅलिसी में दयाकिशन के जीते गए सभी प्रमाण पत्र मात्र कागज के टुकड़े साबित हो रहे हैं।

मंडी की फड़ पर बेच रहा सब्जी

दयाकिशन के खेत में सब्जी खराब होने के बाद घर पर बैठ नहीं सकता। पैसा कमाना भी जरूरी है। इसलिए उसने मंडी में मासाखोर का कार्य शुरू कर दिया। हर दिन अल सुबह सब्जी मंडी पहुंच जाता है। National Medalist Dyakishan Ahlawat

यहां आढ़तियों से सब्जी लेकर फड़ पर लगाकर मंडी में आने वाले ग्राहकों को सब्जी बेचने का कार्य करता है। दोपहर तक उसे 250-300 रुपये कमाई हो पाती है।

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