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पिता नहीं कर पाए अपना आईएएस बनने का सपना पूरा, तो बेटी ने अफसर बन बढ़ाया मान, पढ़िए साक्षी की सफलता की कहानी

Newz Fast, New Delhi कोई सपना अगर खुद के लिए अधूरा रह जाए तो उसे इंसान अपने बच्चों द्वारा पूरा होते देख खुद को तसल्ली पाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है IAS साक्षी गर्ग की, जिनके पिता IAS बनना चाहते थे लेकिन नहीं बन पाए और उनकी बेटी IAS बन पिता के सपने को पूरा किया।

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ias sakshi

कई बार ऐसा होता है कि इंसान सपने तो देखता है लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाता है.. जिसके अनेकों कारण होते हैं.. कभी पैसे की कमी.. तो कहीं सुविधा का न मिलना। लेकिन सपने को भूल पाना इतना आसान नहीं होता।

ऐसा भी देखा जाता है कि कोई सपना अगर खुद के लिए अधूरा रह जाए तो उसे इंसान अपने बच्चों द्वारा पूरा होते देख खुद को तसल्ली पाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है IAS साक्षी गर्ग की, जिनके पिता IAS बनना चाहते थे लेकिन नहीं बन पाए और उनकी बेटी IAS बन पिता के सपने को पूरा किया।

आईएएस साक्षी गर्ग का परिचय

साक्षी गर्ग उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की राबर्ट्सगंज की मूल निवासी हैं। उनके पिता कृष्ण कुमार गर्ग पेशे से व्यापारी है और माता रेनू गर्ग गृहणी है। साक्षी 2018 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बनी।

साक्षी गर्ग की प्रांभिक शिक्षा

शुरू से ही साक्षी गर्ग की पढ़ाई में रुचि थी, उन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई हिंदी मीडियम से सोनभद्र से पूरी की। साक्षी हमेशा ही अपने क्लास में अव्वल आती थी। दसवीं की बोर्ड परीक्षा में साक्षी ने 76% प्रतिशत और इंटर में 81.4% अंक लाकर पूरे जिले में अपने स्कूल का नाम रोशन किया था।

इंटर की परीक्षा पास करने के बाद साक्षी ने यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला लिया। साक्षी ने राजकीय महाविद्यालय से अपनी B.ED की पढ़ाई पूरी की। 

साक्षी के मुताबिक 12वीं में 81 फीसदी अंक लाने के बाद ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला कर लिया था। लेकिन दिक्कत यह थी कि रॉबर्ट्सगंज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन नहीं थे।

इस वजह से साक्षी ने पहले अपना ग्रेजुएशन पूरा करने का फैसला लिया। साक्षी बताती हैं कि ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने दिल्ली में रहकर तैयारी करने का मन बनाया।

इस बारे में उन्होंने अपने पिता से बात की तो वह तुरंत तैयार हो गए। उन्होंने साक्षी से कहा, 'तुम जाने की तैयारी करो, खूब मन लगाकर पढ़ना, बाकी किसी चीज के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है।'

पिता की ये बातें सुनकर साक्षी निश्चिंत हो गईं। साक्षी ने अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की और 2018 में आईएएस की परीक्षा पास करने में सफल रहीं।

साक्षी ने पिता के अधूरे सपने को किया साकार

साक्षी बताती हैं कि उनके पिता भी आईएएस बनना चाहते थे, लेकिन निजी कारणों की वजह से वह अपने इस सपने में रंग भरने से चूक गए। साक्षी के मुताबिक पिता को हमेशा यह बात खलती थी। इस बारे में जब साक्षी को पता चला, तो उन्होंने बिना किसी से बताए खुद आईएएस बनने का मन बना लिया था।