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ऐसे लोगों को कभी नहीं होता है कष्ट, धरती पर पाते हैं स्वर्ग जैसा सुख

Newz Fast, New Delhi चाणक्य नीति के मुताबिक सुख की कल्पना की कोई सीमा नहीं है. लेकिन गुणवान लोगों को ही सच्चे सुख की पहचान होती है. अक्सर लोग सच्चा सुख मतलब धन प्राप्ति मानते हैं जो कि गलत है.

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chanakaya niti

 आचार्य चाणक्य के मुताबिक इंसान को हमेशा अपने गुणों का विस्तार करने पर ध्यान देना चाहिए. किसी को भी इंसान के रूप में अनमोल जीवन मिला है. चाणक्य अपनी नीति के माध्यम से कहते हैं जिसने जीवन के मोल को पहचान लिया, उसके लिए पूरा संसार एक परिवार से समान है. हर इंसान को सुख की कामना होती है. लेकिन सच्चा सुख क्या है इस हर कोई नहीं जान पता है. चाणक्य ने इसे बहुत ही आसान शब्दों में बताया है. 

केवल धन प्राप्ति नहीं है सच्चा सुख

चाणक्य नीति के मुताबिक सुख की कल्पना की कोई सीमा नहीं है. लेकिन गुणवान लोगों को ही सच्चे सुख की पहचान होती है. अक्सर लोग सच्चा सुख मतलब धन प्राप्ति मानते हैं जो कि गलत है. चाणक्य कहते हैं कि धन प्राप्ति को सच्चा सुख मान लेना, महज भ्रम है. धन का संबंध लक्ष्मी से है और मां लक्ष्मी चंचला होती हैं. किसी एक जगह पर बहुत अधिक दिनों तक रहती हैं. चाणक्य नीति के मुताबिक इंसान अगर अपने मन की इच्छाओं पर नियंत्रण कर ले तो जीवन सुखी रहता है.

बात मानने वाली पत्नी

चाणक्य के मुताबिक इस इंसान की पत्नी उसकी बातों को मानती है. वह सबसे अधिक सुखी होता है. पति की सफलता में एक आज्ञाकारी पत्नी का बहुत अधिक योगदान होता है. इसके अलावा कुलीन और योग्य पत्नी सुख-दुख में हमेशा साथ रहती है. जिससे ऐसे इंसान को कष्ट नहीं झेलना पड़ता है.

आज्ञाकारी संतान

चाणक्य नीति के अनुसार जिस इंसान की की संतान आज्ञाकारी और योग्य है. उसके लिए यह धरती ही स्वर्ग जैसा है. योग्य और आज्ञाकारी संतान हमेशा अपने कुल-खानदान और देश का नाम रोशन करता है. जिस इंसान को अपने संतान से ऐसा सुख मिलता है उसके लिए इसके बढ़कर और कोई सुख नहीं है.