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'जयेशभाई...' ने लगाया जोर, पर फिल्म निकली बेहद कमजोर

फिल्म समीक्षा: जयेशभाई जोरदार
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jayeshbhai

Newz Fast,New Delhi गुजरात की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' (Jayeshbhai Jordaar) कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक असमानता जैसे गंभीर मुद्दों पर आधारित है, लेकिन कमजोर लेखन और लचर निष्पादन के कारण यह एक बेहद उबाऊ फिल्म है। सब्जेक्ट भी नया नहीं है और इसके निष्पादन में घिसा-पिटा फॉर्मूला ही अपनाया गया है।

यह न तो पूरी तरह से गंभीर सिनेमा है और न ही प्रॉपर कॉमेडी। यह दोनों जॉनर के बीच संघर्ष करती एकदम सपाट फिल्म है, जो एंटरटेनमेंट और ह्यूमर क्रिएट करने में विफल है।

दो घंटे की सुस्त जर्नी
यह कहानी है, गुजरात के प्रवीणगढ़ के जयेशभाई की। वह 9 वर्ष की बेटी का पिता है और जल्द ही एक बार फिर से पिता बनने वाला है। लेकिन, उसका गांव ऐसा है, जहां के लोगों की रूढ़िवादी मानसिकता है। यहां बेटी की कोई अहमियत नहीं है। जयेशभाई के माता-पिता परिवार के वारिस के तौर पर बेटा चाहते हैं।

परीक्षण से पता चलता है कि जयेश की गर्भवती पत्नी मुद्रा लड़की को जन्म देने वाली है। ऐसे में जयेश अपनी अजन्मी संतान को बचाने के लिए पत्नी मुद्रा और बेटी सिद्धि के साथ घर छोड़कर निकल पड़ता है...।

  • राइटिंग-डायरेक्शन: दिव्यांग ठक्कर
  • म्यूजिक: विशाल-शेखर
  • एडिटिंग: नम्रता राव
  • स्टार कास्ट: रणवीर सिंह, शालिनी पांडे, बोमन ईरानी, रत्ना पाठक शाह, जिया वैद्य, पुनीत इस्सर
  • रन टाइम: 121 मिनट

स्क्रिप्ट एकदम नीरस है। स्क्रीनप्ले एंगेजिंग नहीं है। दिव्यांग ठक्कर का निर्देशन भी कामचलाऊ है। उनकी पेशकश ऐसी नहीं है, जिससे दो घंटे तक जुड़ाव बना रहे और सिनेमाघर से निकलने के बाद भी इसके मैसेज पर चर्चा हो। फिल्म सुस्त गति से आगे बढ़ती है। गीत-संगीत कमजोर कड़ी है। सिनेमैटोग्राफी उपयुक्त है।

परफॉर्मेंस की बात करें तो रणवीर सिंह (Ranveer Singh) ने गुजराती अंदाज को पकड़ने की अच्छी कोशिश की है। बोमन ईरानी (Boman Irani ) असरदार लगे हैं।

शालिनी पांडे (Shalini Pandey) अपनी भूमिका में फिट हैं। रत्ना पाठक शाह (Ratna Pathak Shah ) का किरदार सीमित है। वह कुछ अलग नहीं कर सकीं। जिया का चुलबुलापन इम्प्रेस करता है। पुनीत इस्सर ठीक लगे हैं। बहरहाल, 'जयेशभाई...' ने जोर तो लगाया, पर फिल्म 'जोरदार' नहीं बन पायी।

'जयेशभाई...' ने लगाया जोर, पर फिल्म निकली बेहद कमजोर

'जयेशभाई...' ने लगाया जोर, पर फिल्म निकली बेहद कमजोर