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अक्षर अदब:‘महाभारत के योद्धा’ जानकारियों से भरपूर पुस्तक है, जो उपहार के रूप में देने योग्य भी है

महाभारत से कोई अपरिचित नहीं। कथाओं में गुंथी कथाओं में घुली रोचकता और सबक़ टीवी धारावाहिक के रूप में भी ख़ूब धाक जमा चुके हैं।
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mhabhart k yodha dent

Newz Fast, Hisar  इसलिए इसे किसी ऐसे रूप में प्रस्तुत करना कि पढ़ने वाले का मन रमा रहे, आसान काम नहीं है। ‘महाभारत के योद्धा’ यह काम कर पाती है।

देवदत्त पटनायक के चित्रांकन से सजी यह पुस्तक जानकारियों से भरपूर है।

‘महाभारत अठारह अध्यायों में अठारह दिनों तक अठारह सेनाओं के बीच लड़ी लड़ाई की कहानी है।’ पुस्तक की शुरुआत में लिखे इस वाक्य से ही पता चल जाता है कि पुस्तक महाभारत के बारे में कुछ नया भी बताने वाली है।

कुरु वंश के लोगों के आपसी रिश्ते, उनकी पृष्ठभूमि में चलती कथाएं और प्रसंग के बाद प्रसंगों में आते चरित्रों के आपसी रिश्तों को उलझने नहीं दिया लेखक ने।

पुस्तक को छह लड़ाइयों में बांटा गया है।

पूरी महाभारत के हर चरण को एक लड़ाई के तहत समेटा गया है, जैसे लाक्षागृह से निकलकर जंगल में रहने वाले पांडवों के उस काल को शरणार्थियों की लड़ाई कहा गया, तो उसके बाद के द्यूत क्रीड़ा वाले हिस्से को राजाओं की लड़ाई कहा गया।

कुरुक्षेत्र में जो हुआ वो योद्धाओं की लड़ाई के तहत रखा गया है। पुस्तक का सबसे रोचक पहलू है, कथा के साथ में गीता के उपदेशों का गुंथा जाना। बड़े चित्रांकनों के बीच कम शब्दों में लिखी कथा किसी को भी महाभारत का सिंहावलोकन दे सकती है।

मिहीर सासवडकर ने पुस्तक का हिंदी में अनुवाद किया है। हिंदी के पाठक गणेश जी के स्वरूप से परिचित हैं। उनके स्वरूप की व्याख्या से बचा जा सकता था। अन्यथा पुस्तक पठनीय है और उपहार के रूप में देने योग्य भी।