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दादी ने पोती से अकेले में कही ऐसी बात, महिला ने सास को परवरिश करने से रोका

Newz Fast, New Delhi बच्चे से जुड़े किसी भी फैसले में आमतौर माता-पिता के अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी अपनी राय देते हैं. घरवालों की दबाव में आकर कई बार पैरेंट्स को अपने फैसले बदलने पड़ जाते हैं. इस तरह के मामलों की वजह से अक्सर रिश्ते भी खराब हो जाते हैं. सोशल मीडिया पर एक महीला ने अपनी एक ऐसी ही कहानी शेयर की है.
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saas ki harkto se pareshan mahila

बच्चों की परवरिश में माता-पिता दिन-रात एक कर देते हैं. बच्चे से जुड़े किसी भी फैसले में आमतौर माता-पिता के अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी अपनी राय देते हैं. हालांकि, कई बार परिवार की तरफ से पेरेंट्स को कुछ बातों पर समर्थन नहीं मिलता है और चीजें खराब होनी शुरू हो जाती हैं.

जैसे कि आप अपने बच्चे को शाकाहारी बनाना चाहते हैं और घर का कोई सदस्य उसे नॉनवेज खिलाता हो. या फिर आप अपनी बच्ची को पढ़ाई के लिए बाहर भेजना चाहते हों लेकिन घर के सदस्य इसका विरोध करते हों. सुनने में ये बातें छोटी-मोटी लग सकती है लेकिन इनकी वजह से अक्सर रिश्ते भी खराब हो जाते हैं. सोशल मीडिया पर एक महिला ने अपनी एक ऐसी ही कहानी शेयर की है.

एक महिला ने लिखा, 'मेरी बेटी 10 महीने की है और उसकी देखरेख के लिए मेरी सास हमारे साथ ही रहती हैं. जब से मेरी बेटी पैदा हुई है, मेरी सास ने एक ही रट लगा रखी है कि मैं उसके कान कब छिदवाऊंगी. मैं उस समय तक इंतजार करना चाहती थी जब तक कि मेरी बेटी खुद इसकी इच्छा ना जताए.

वो अभी बोल भी नहीं सकती है लेकिन मेरी सास की राय मुझसे बिल्कुल अलग है. मेरी मां ने खुद मेरे कान तब छिदवाए थे जब मैं 10 साल की हो गई थी. मेरी सास और ननद का कहना है कि छोटी उम्र में ही कान छिदवा देना बेहतर होता है क्योंकि बड़े होने पर उसका दर्द याद नहीं रहता.'

महिला ने लिखा, 'कुछ हफ्ते पहले मैं अपने पति के साथ कहीं बाहर गई हुई थी. वापस आते समय जब हम घर के अंदर घुसने ही वाले थे तभी मुझे अपनी सास की आवाज आई. वो मेरी बेटी से कह रही थीं कि वो उसे लेकर बाहर शॉपिंग पर जाएंगी और अच्छी-अच्छी ईयररिंग्स दिलाएंगी.

ये सुनकर मैं गुस्से से आगबबूला हो गई. मैंने अंदर जाकर उनसे कहा कि अगर वो मेरे फैसले का सम्मान नहीं करेंगी तो मैं भरोसा नहीं कर पाउंगी. ऐसी स्थिति में मैं अपनी बच्ची उनके साथ नहीं छोड़ सकती और उसकी परवरिश के लिए किसी और को ढूंढ लूंगी.'

'मेरी सास किसी ना किसी बहाने से  मेरी बेटी को अकेले लेकर चली जाती हैं. मैंने अपनी सास से अब कह दिया है कि उन्हें मेरी बेटी से मिलना हो तो सामने आकर मिला करें क्योंकि अब मैं उन पर और भरोसा नहीं कर सकती. मुझे डर है कि वो मेरे पीठ पीछे ले जाकर मेरी बेटी के कान छिदवा देंगी.

वो कई ऐसे काम करती हैं जो मैं अपनी बच्ची के लिए सही नहीं मानती ' महिला की ये पोस्ट बहुत तेजी से वायरल हो रही है.  लोग तरह-तरह से इस पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं.

ज्यादातर इस पर महिला का समर्थन कर रहे हैं. एक ने लिखा है कि बच्चियों के लिए ये एक यातना की तरह होता है. दबाव में आकर कान छिदवाना देना और फिर उनका ध्यान ना रख पाना.

मुझे एलर्जी थी, इसके बावजूद में मेरे कान जबरदस्ती छिदवा दिए गए. ये मेरे लिए एक बुरे सपने की तरह था.' एक ने लिखा, अगर कान छिदवाना नहीं तो हेयर कट लेकिन अक्सर लोग बच्चे से जुड़े फैसले पर दबाव बना देते हैं जो पेरेंट्स के लिए मुसीबत बन जाता है.'