Haryana Mega Projects: नमो भारत से AIIMS और गुरुग्राम मेट्रो तक, जानें हरियाणा में कहां चल रहा कितना बड़ा प्रोजेक्ट

हरियाणा में नमो भारत, मेट्रो, AIIMS और औद्योगिक परियोजनाओं का सांकेतिक दृश्य
हरियाणा में नमो भारत, मेट्रो, AIIMS और औद्योगिक परियोजनाओं का सांकेतिक दृश्य

चंडीगढ़। हरियाणा में सड़क, रेल आधारित तेज परिवहन, मेट्रो, स्वास्थ्य सेवाओं और औद्योगिक ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें हजारों करोड़ रुपये की ऐसी परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनका असर आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर के साथ हिसार, रेवाड़ी, पानीपत, करनाल और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों पर पड़ सकता है।

सबसे ज्यादा चर्चा दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर की है। इसके अलावा गुरुग्राम मेट्रो का निर्माण, माजरा में AIIMS, हिसार का एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर और नांगल चौधरी का बहु-माध्यम माल ढुलाई केंद्र भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल हैं।

लेकिन इन सभी को “2026 में हरियाणा सरकार द्वारा मंजूर परियोजनाएं” कहना सही नहीं होगा।

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कुछ परियोजनाएं केंद्र और राज्य की भागीदारी वाली हैं, कुछ को पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी और अब निर्माण चल रहा है, जबकि कुछ अभी प्रस्ताव या निवेश समझौते के चरण में हैं।

आइए जानते हैं हरियाणा की प्रमुख बड़ी परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति।

दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर

हरियाणा मंत्रिमंडल ने 24 मार्च 2026 को दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी।

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इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹33,051 करोड़ बताई गई है।

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प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई करीब 136.30 किलोमीटर है।

यह दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर उत्तर दिशा में हरियाणा के प्रमुख शहरों को तेज सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की योजना का हिस्सा है।

कॉरिडोर से सोनीपत, पानीपत और करनाल क्षेत्र को विशेष रूप से फायदा मिलने की उम्मीद है।

हरियाणा को कितना पैसा देना होगा?

परियोजना में हरियाणा सरकार की हिस्सेदारी करीब ₹7,472 करोड़ बताई गई है।

यह राशि एक साथ खर्च होने के बजाय परियोजना की प्रगति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से दी जानी है।

यह नमो भारत नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर में क्षेत्रीय आवागमन का समय कम करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।

परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से हरियाणा के औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों तक सार्वजनिक परिवहन का एक नया विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

करनाल से आगे पंचकूला तक बढ़ाने की भी योजना

हरियाणा सरकार ने दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर को भविष्य में आगे बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया है।

इसे करनाल से आगे कुरुक्षेत्र और साहा के रास्ते पंचकूला तक ले जाने की संभावना पर विचार किया गया है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है।

दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर की मंजूरी और करनाल से पंचकूला तक संभावित विस्तार को एक ही चरण की स्वीकृत परियोजना नहीं समझना चाहिए।

आगे के विस्तार के लिए केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ अलग प्रक्रिया जरूरी होगी।

स्टेशनों के आसपास भी हो सकता है बड़ा विकास

नमो भारत जैसे बड़े परिवहन गलियारों के साथ केवल स्टेशन और रेल ढांचा ही नहीं बनता।

स्टेशनों के आसपास आवासीय, व्यावसायिक और दूसरे शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए परिवहन आधारित विकास नीति का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इससे सोनीपत, पानीपत और करनाल क्षेत्र में स्टेशन के आसपास जमीन के उपयोग और शहरी विकास पर दीर्घकालीन असर पड़ सकता है।

हालांकि, किसी क्षेत्र में जमीन के भाव बढ़ने या निवेश पर निश्चित लाभ मिलने का दावा अभी नहीं किया जा सकता।

रेवाड़ी के माजरा में बन रहा AIIMS

हरियाणा की सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजनाओं में रेवाड़ी जिले के माजरा में बन रहा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) शामिल है।

इस परियोजना की स्वीकृत लागत करीब ₹1,646 करोड़ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी 2024 को इसकी आधारशिला रखी थी।

इसलिए इसे 2026 में मंजूर नई परियोजना कहना सही नहीं होगा।

2026 में मुख्य मुद्दा इसकी निर्माण प्रगति और आसपास की संपर्क सुविधाओं का है।

210 एकड़ से अधिक क्षेत्र में AIIMS

माजरा AIIMS का परिसर 210 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है।

योजना में अस्पताल, चिकित्सा शिक्षा, आवासीय सुविधाएं और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक ढांचा शामिल है।

परियोजना के पूरी तरह शुरू होने के बाद रेवाड़ी के साथ दक्षिण हरियाणा के दूसरे जिलों और आसपास के राजस्थान क्षेत्र के मरीजों को भी बड़े चिकित्सा संस्थान तक पहुंच का विकल्प मिल सकता है।

AIIMS तक पहुंच आसान बनाने की तैयारी

AIIMS का मुख्य भवन बनाना ही पर्याप्त नहीं है। अस्पताल तक मरीजों, डॉक्टरों, कर्मचारियों और आपातकालीन वाहनों की आसान पहुंच भी जरूरी है।

इसी कारण सड़क संपर्क, रेलवे ओवरब्रिज, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं पर अलग से काम किया जा रहा है।

सितंबर 2026 में राज्य स्तर पर बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान माजरा AIIMS से जुड़ी संपर्क सुविधाओं और दूसरे लंबित कार्यों पर चर्चा हुई।

NH-11 से बेहतर संपर्क उपलब्ध कराने के लिए बड़े सड़क ढांचे की योजना भी इससे जुड़ी हुई है।

MBBS और OPD को लेकर भी तैयारी

माजरा AIIMS में चिकित्सा शिक्षा और बाह्य रोगी सेवाएं शुरू करने की दिशा में भी तैयारियां आगे बढ़ी हैं।

लेकिन OPD की संभावित शुरुआत और पूर्ण अस्पताल संचालन को एक ही बात नहीं समझना चाहिए।

बड़े चिकित्सा संस्थान चरणबद्ध तरीके से शुरू हो सकते हैं।

इसलिए जब तक संबंधित संस्थान या स्वास्थ्य मंत्रालय कोई निश्चित तारीख जारी न करे, OPD शुरू होने की तारीख को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।

गुरुग्राम मेट्रो पर तेजी से चल रहा काम

गुरुग्राम की नई मेट्रो परियोजना भी हरियाणा की सबसे बड़ी शहरी परिवहन परियोजनाओं में शामिल है।

परियोजना की स्वीकृत लागत करीब ₹5,452.72 करोड़ है।

यह मेट्रो मिलेनियम सिटी सेंटर से पुराने गुरुग्राम होते हुए साइबर सिटी तक जाएगी और द्वारका एक्सप्रेसवे के पास भी संपर्क उपलब्ध कराएगी।

कुल मार्ग करीब 28.5 किलोमीटर का है।

इस परियोजना में लगभग 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं।

पुराने गुरुग्राम को मिलेगा मेट्रो नेटवर्क

गुरुग्राम के नए हिस्सों में पहले से मेट्रो संपर्क उपलब्ध है, लेकिन पुराने गुरुग्राम के बड़े हिस्से लंबे समय से मेट्रो नेटवर्क से बाहर रहे हैं।

नई परियोजना का बड़ा उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है।

मेट्रो मार्ग से सेक्टर 9, सेक्टर 10, पालम विहार और पुराने गुरुग्राम के कई हिस्सों को सार्वजनिक परिवहन का नया विकल्प मिलने की उम्मीद है।

निर्माण पूरा होने के बाद यह मौजूदा दिल्ली मेट्रो और रैपिड मेट्रो नेटवर्क के साथ भी संपर्क मजबूत कर सकती है।

दूसरे चरण के निर्माण पर भी प्रगति

2026 में गुरुग्राम मेट्रो के अलग-अलग निर्माण पैकेज आगे बढ़े हैं।

पुराने गुरुग्राम से साइबर सिटी की दिशा वाले हिस्से के लिए भी निर्माण प्रक्रिया और निविदाओं से जुड़े फैसले सामने आए हैं।

लेकिन पूरी ₹5,452 करोड़ की परियोजना और किसी एक निर्माण पैकेज की लागत को अलग-अलग समझना जरूरी है।

एक निर्माण पैकेज पूरी मेट्रो परियोजना की कुल लागत नहीं होता।

रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो से हरियाणा को फायदा

दिल्ली मेट्रो के रिठाला-नरेला-कुंडली विस्तार का एक छोटा हिस्सा हरियाणा में आएगा।

हरियाणा हिस्से में नरेला से कुंडली की दिशा में करीब 2.7 किलोमीटर विस्तार प्रस्तावित है।

इस हिस्से में कुंडली और नाथूपुर क्षेत्र को मेट्रो संपर्क मिलने की योजना है।

इससे सोनीपत जिले के दिल्ली सीमा से लगे हिस्सों को भविष्य में दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से सीधा लाभ मिल सकता है।

हिसार में बड़ा औद्योगिक क्लस्टर

हिसार में प्रस्तावित एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर भी हरियाणा की प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल है।

इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹4,680 करोड़ के आसपास बताई गई है।

इसका उद्देश्य हिसार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश के लिए नियोजित बुनियादी ढांचा तैयार करना है।

परियोजना दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे से जुड़ी व्यापक औद्योगिक विकास रणनीति का हिस्सा है।

जमीन और पर्यावरण मंजूरी महत्वपूर्ण चरण

बड़े औद्योगिक क्लस्टर में केवल कारखानों के लिए जमीन देना पर्याप्त नहीं होता।

इसके लिए सड़क, बिजली, पानी, जल निकासी, औद्योगिक भूखंड और दूसरी आधारभूत सुविधाएं तैयार करनी होती हैं।

हिसार परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने और पर्यावरण संबंधी मंजूरी जैसे महत्वपूर्ण चरणों पर प्रगति हुई है।

बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये के कार्य पैकेज की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।

हालांकि, निविदा प्राप्त होना और अंतिम ठेका दिया जाना अलग-अलग चरण होते हैं। इसलिए निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले निर्माण ठेका अंतिम मानना सही नहीं होगा।

नांगल चौधरी में विशाल माल ढुलाई केंद्र

महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी में विकसित किया जा रहा एकीकृत बहु-माध्यम माल ढुलाई केंद्र राज्य की महत्वपूर्ण औद्योगिक और परिवहन परियोजनाओं में से एक है।

यह परियोजना करीब 886 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही है।

इसका उद्देश्य रेल और सड़क के माध्यम से औद्योगिक माल की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

विशेष रूप से मानेसर, बावल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण हो सकता है।

रेल और सड़क दोनों से जुड़ेगा केंद्र

बहु-माध्यम माल ढुलाई केंद्र की खासियत यह है कि माल को केवल ट्रकों पर निर्भर रहने के बजाय रेल और सड़क दोनों माध्यमों से भेजने की सुविधा विकसित की जाती है।

इससे लंबी दूरी की माल ढुलाई की क्षमता बढ़ सकती है।

नांगल चौधरी परियोजना का विकास भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और इससे जुड़े कुछ बाहरी संपर्क तथा रेल ढांचे पर पहले ही काम हो चुका है।

गुरुग्राम और फरीदाबाद में सड़क परियोजनाएं

गुरुग्राम और फरीदाबाद में बढ़ते यातायात को देखते हुए कई बड़ी सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं पर भी काम या योजना बनाई जा रही है।

इनमें दक्षिणी परिधीय सड़क, वाटिका चौक और आसपास के क्षेत्रों की संपर्क क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाएं शामिल हैं।

लेकिन यहां भी अलग-अलग सड़क परियोजनाओं की लागत को जोड़कर एक ही स्वीकृत परियोजना के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

कई परियोजनाएं अलग एजेंसियों, अलग चरणों और अलग मंजूरी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ती हैं।

₹10,000 करोड़ का Avaada निवेश क्या सरकारी परियोजना है?

हिसार से जुड़ा करीब ₹10,000 करोड़ का Avaada Group निवेश प्रस्ताव भी चर्चा में रहा है।

लेकिन इसे हरियाणा सरकार द्वारा ₹10,000 करोड़ खर्च करके बनाई जा रही सरकारी परियोजना नहीं समझना चाहिए।

यह निजी क्षेत्र के निवेश से जुड़ा प्रस्ताव या समझौता है।

इसी तरह निजी कंपनियों के औद्योगिक निवेश और सरकार की बजटीय परियोजनाओं को एक ही सूची में रखते समय उनकी प्रकृति स्पष्ट करना जरूरी है।

Haryana Projects 2026: एक नजर में प्रमुख परियोजनाएं

परियोजना अनुमानित लागत/स्थिति
दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत करीब ₹33,051 करोड़
माजरा AIIMS, रेवाड़ी करीब ₹1,646 करोड़
गुरुग्राम मेट्रो करीब ₹5,453 करोड़
हिसार एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर करीब ₹4,680 करोड़
नांगल चौधरी माल ढुलाई केंद्र करीब 886 एकड़ में विकास
Avaada हिसार निवेश प्रस्ताव करीब ₹10,000 करोड़ का निजी निवेश प्रस्ताव

अलग-अलग परियोजनाएं अलग चरणों में हैं। लागत में बाद के संशोधन भी संभव हैं।

इन परियोजनाओं से आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?

नमो भारत और मेट्रो जैसी परियोजनाओं का सीधा उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन और शहरों के बीच संपर्क बेहतर करना है।

AIIMS स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

हिसार औद्योगिक क्लस्टर और नांगल चौधरी माल ढुलाई केंद्र औद्योगिक गतिविधियों और माल परिवहन के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध करा सकते हैं।

लेकिन रोजगार, जमीन की कीमत या आर्थिक लाभ के निश्चित आंकड़े परियोजना पूरी होने से पहले बताना उचित नहीं होगा।

सभी परियोजनाओं को 2026 की नई मंजूरी न समझें

इन परियोजनाओं को लेकर यही सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है।

माजरा AIIMS की आधारशिला 2024 में रखी गई थी।

गुरुग्राम मेट्रो को केंद्र सरकार से मंजूरी 2023 में मिल चुकी थी।

वहीं दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत परियोजना को हरियाणा मंत्रिमंडल ने मार्च 2026 में मंजूरी दी।

दूसरी परियोजनाएं निर्माण, निविदा, मंजूरी या निवेश प्रस्ताव के अलग-अलग चरणों में हैं।

इसलिए इन सभी को “हरियाणा सरकार ने 2026 में मंजूर किए इतने हजार करोड़ के प्रोजेक्ट” कहना तथ्यात्मक रूप से सही तस्वीर नहीं देगा।

आगे किस परियोजना पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?

दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत परियोजना में राज्य की मंजूरी के बाद आगे की संस्थागत और केंद्रीय प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।

गुरुग्राम मेट्रो में निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रहेगी।

माजरा AIIMS में अस्पताल और चिकित्सा सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू करना बड़ा पड़ाव होगा।

वहीं हिसार औद्योगिक क्लस्टर और नांगल चौधरी माल ढुलाई केंद्र में जमीनी बुनियादी ढांचे की प्रगति उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

Mukesh Gusaiana
लेखक परिचय

Mukesh Gusaiana

हिंदी न्यूज़ राइटर एवं डिजिटल कंटेंट क्रिएटर

मुकेश गुसाईना न्यूज़ फ़ास्ट के हिंदी न्यूज़ राइटर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। वह कृषि, मंडी भाव, सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार, बिजनेस, टेक्नोलॉजी,और देश-दुनिया की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं।