आरबीआई ने महंगा किया कर्ज, रेपो रेट में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी, पढ़ें 10 बड़ी बातें

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है
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Newz Fast, New Delhi भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे भारत में कर्ज महंगा हो गया है और अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह कम हो जाएगा।

लोगों के खर्चे कम होंगे। इसके साथ ही रेपो रेट 5.4 फीसदी हो गया है। इससे कर्ज की मासिक किस्त बढ़ जाएगी। साथ ही मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने भी नरम नीति रुख को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था उच्च मुद्रास्फीति से जूझ रही है और इसे नियंत्रण में लाने की जरूरत है।

दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने भी मुद्रास्फीति को नियंत्रण में लाने के लिए नरम नीति रुख को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान 7.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। वहीं, केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई के अनुमान को 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा है।

10 बड़ी बातें

  • आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद कुल रेपो रेट 5.4 फीसदी हो गया।
  • रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऊंची महंगाई से जूझ रही है।
  • रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान भारत से 13.3 अरब डॉलर की पूंजी निकाली गई।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने आर्थिक विकास के पूर्वानुमान को कम करके मंदी का जोखिम उठाया।
  • विदेशी मुद्रा भंडार वित्तीय क्षेत्र में पर्याप्त पूंजी प्रदान करते हैं और वैश्विक विकास के प्रभाव से बचाव करते हैं।
  • मौद्रिक नीति समिति ने सावधि जमा सुविधा (एसडीएफ) दर को 4.65 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.15 प्रतिशत कर दिया।
  • मौद्रिक नीति समिति ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए नरम नीति रुख को उलटने पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया।
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति असंतोषजनक स्तर पर है। मुद्रास्फीति 6 फीसदी से ऊपर रहने की उम्मीद है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास का अनुमान 7.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा
  • बैंकों की ऋण वृद्धि बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई। एक साल पहले यह 5.5 फीसदी था।
  • घरेलू आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। ग्रामीण मांग में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है।