Wheat Variety: किसानों के लिए खुशखबरी! गेहूं की ये नई किस्म देगी 77.5 क्विंटल उपज, बस कर दे ये एक काम

Wheat Variety HI 1683
Wheat Variety HI 1683

नई दिल्ली। खरीफ फसलों की कटाई के साथ ही किसान अब रबी सीजन की तैयारी में जुटने लगे हैं। गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल सही किस्म चुनने का होता है, क्योंकि बीज का चुनाव फसल की पैदावार के साथ दाने की गुणवत्ता और रोगों से मुकाबला करने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है।

इस बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के इंदौर स्थित क्षेत्रीय केंद्र की विकसित गेहूं की किस्म HI 1683 किसानों के बीच चर्चा में है।

इस किस्म का नाम पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट रखा गया है।

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इसकी सबसे खास बात इसकी उपज क्षमता है। बेहतर परिस्थितियों में यह किस्म 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है।

लेकिन किसानों को केवल इस अधिकतम आंकड़े को देखकर बीज का चुनाव नहीं करना चाहिए।

असल उपज खेत की मिट्टी, सिंचाई, बुवाई का समय, खाद प्रबंधन, मौसम और फसल की देखभाल पर निर्भर करेगी।

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HI 1683 की औसत उपज कितनी है?

HI 1683 गेहूं की औसत उपज करीब 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

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वहीं अनुकूल परिस्थितियों और अच्छे फसल प्रबंधन में इसकी उपज क्षमता 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है।

एक एकड़ के हिसाब से देखें तो 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर लगभग 22.7 क्विंटल प्रति एकड़ बैठता है।

वहीं 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की अधिकतम क्षमता लगभग 31.4 क्विंटल प्रति एकड़ के बराबर होती है।

हालांकि, इसे हर खेत में मिलने वाली निश्चित पैदावार नहीं समझना चाहिए।

77.5 क्विंटल उपज की गारंटी नहीं

किसानों के लिए यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है।

किसी किस्म की अधिकतम उपज क्षमता और किसान के खेत में मिलने वाली वास्तविक उपज अलग हो सकती है।

77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का आंकड़ा इस किस्म की उपज क्षमता को दर्शाता है।

अगर बुवाई में देरी हो जाए, सिंचाई पर्याप्त न मिले, मिट्टी अनुकूल न हो या रोग-कीट का प्रकोप हो जाए तो वास्तविक पैदावार इससे कम रह सकती है।

इसलिए “HI 1683 लगाते ही 77.5 क्विंटल उत्पादन मिलेगा” कहना सही नहीं होगा।

किस क्षेत्र के किसानों के लिए है HI 1683?

यही इस किस्म से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण जानकारी है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की जानकारी में HI 1683 को मध्य क्षेत्र में समय पर बोई गई और सिंचित परिस्थितियों के लिए अनुशंसित किया गया है।

इसलिए देश के किसी भी राज्य का किसान केवल अधिक पैदावार देखकर बड़े क्षेत्र में इसकी बुवाई न करे।

अपने जिले के लिए इसकी अनुशंसा की जानकारी पहले कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग से लेना बेहतर रहेगा।

हरियाणा-पंजाब के किसान खास ध्यान दें

हरियाणा और पंजाब के किसानों को HI 1683 की 77.5 क्विंटल वाली उपज देखकर इसे अपने क्षेत्र की सबसे बेहतर किस्म मान लेने से बचना चाहिए।

उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए गेहूं की दूसरी अनुशंसित किस्में उपलब्ध हैं।

उदाहरण के लिए ICAR की जानकारी में DBW 187 को उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र और मध्य क्षेत्र में समय पर बोई गई सिंचित परिस्थितियों के लिए अनुशंसित बताया गया है।

इसलिए हरियाणा-पंजाब के किसान अपने क्षेत्र के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित किस्मों की तुलना करने के बाद ही बीज चुनें।

HI 1683 सिर्फ ज्यादा पैदावार के लिए खास नहीं

HI 1683 को बायोफोर्टिफाइड गेहूं की किस्म के रूप में विकसित किया गया है।

बायोफोर्टिफाइड का सरल अर्थ ऐसी फसल किस्म से है, जिसमें पोषण से जुड़े कुछ तत्वों की मात्रा बेहतर करने पर भी ध्यान दिया गया हो।

HI 1683 में करीब 11.7 प्रतिशत प्रोटीन बताया गया है।

इसके अलावा इसमें करीब 40.4 पीपीएम आयरन और 38.3 पीपीएम जिंक की मात्रा बताई गई है।

इस वजह से इस किस्म को केवल पैदावार ही नहीं बल्कि पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रोटी और आटे के लिए भी उपयोगी

HI 1683 ब्रेड गेहूं की श्रेणी की किस्म है।

इससे प्राप्त गेहूं का इस्तेमाल आटा, रोटी, चपाती और दूसरे खाद्य उत्पादों के लिए किया जा सकता है।

इसकी दाना गुणवत्ता और पोषण संबंधी विशेषताएं इसे सामान्य उत्पादन के साथ खाद्य उपयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।

नई किस्म है तो पहले छोटे क्षेत्र में करें शुरुआत

किसी भी नई गेहूं किस्म को केवल अधिकतम उपज का आंकड़ा देखकर पूरे खेत में लगाना किसानों के लिए सही रणनीति नहीं होगी।

अगर आपके क्षेत्र में यह किस्म अनुशंसित है तो पहली बार सीमित क्षेत्र में इसकी खेती करके स्थानीय प्रदर्शन देखना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

इसके साथ प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोत से बीज लेना भी जरूरी है।

ऑनलाइन या बाजार में केवल “HI 1683” नाम लिखे पैकेट को देखकर बीज न खरीदें।

बुवाई के समय इन बातों का रखें ध्यान

अच्छी पैदावार के लिए केवल किस्म जिम्मेदार नहीं होती।

खेत की तैयारी, समय पर बुवाई, उचित बीज दर, संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और रोग-कीट प्रबंधन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

गेहूं की किस्म चुनने से पहले किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी और सिंचाई की उपलब्धता को ध्यान में रखें।

अगर बुवाई सामान्य समय से देर से करनी है तो समय पर बुवाई के लिए विकसित किस्म के बजाय देर से बुवाई के लिए अनुशंसित किस्म चुनना अधिक उचित हो सकता है।

बीज खरीदने से पहले किसान क्या जांचें?

सबसे पहले देखें कि किस्म आपके कृषि क्षेत्र के लिए अनुशंसित है या नहीं।

इसके बाद प्रमाणित स्रोत से बीज खरीदें और पैकेट पर किस्म का नाम, अंकुरण क्षमता, शुद्धता, लॉट नंबर और दूसरी जरूरी जानकारी जांचें।

बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से बीज दर और बीज उपचार की जानकारी लेना भी फायदेमंद रहेगा।

इससे दूसरे क्षेत्र की खेती पद्धति को अपने खेत में बिना जांच अपनाने की गलती से बचा जा सकता है।

किसानों के लिए सबसे जरूरी बात

HI 1683 निश्चित रूप से अधिक उपज क्षमता और बेहतर पोषण गुणों वाली महत्वपूर्ण गेहूं किस्म है।

इसकी औसत उपज करीब 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और बेहतर परिस्थितियों में क्षमता 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है।

लेकिन 77.5 क्विंटल को गारंटीकृत उत्पादन नहीं समझना चाहिए।

इसके अलावा यह भी देखना जरूरी है कि किस्म आपके राज्य और कृषि जलवायु क्षेत्र के लिए अनुशंसित है या नहीं।

सही क्षेत्र + सही किस्म + सही समय पर बुवाई + उचित सिंचाई और पोषण प्रबंधन—इन सभी को साथ लेकर चलने पर ही किसान किसी उन्नत किस्म की वास्तविक क्षमता का बेहतर लाभ उठा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

HI 1683 गेहूं की उपज कितनी है?

इसकी औसत उपज करीब 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। अनुकूल परिस्थितियों में इसकी उपज क्षमता 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है।

एक एकड़ में HI 1683 कितना गेहूं दे सकती है?

औसत उपज को बदलकर देखें तो करीब 22.7 क्विंटल प्रति एकड़ बैठती है, जबकि 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज क्षमता करीब 31.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। वास्तविक उत्पादन खेत और प्रबंधन के अनुसार अलग होगा।

HI 1683 का पूरा नाम क्या है?

इस किस्म का नाम पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 है।

क्या हरियाणा के किसान HI 1683 लगा सकते हैं?

केवल अधिक उपज देखकर इसे चुनना सही नहीं होगा। आधिकारिक जानकारी में इसे मध्य क्षेत्र की समय पर बोई गई सिंचित परिस्थितियों के लिए अनुशंसित किया गया है। हरियाणा के किसान अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से क्षेत्र के लिए अनुशंसित गेहूं किस्म की जानकारी लेकर बीज चुनें।

HI 1683 में कितना प्रोटीन है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें करीब 11.7 प्रतिशत प्रोटीन, 40.4 पीपीएम आयरन और 38.3 पीपीएम जिंक पाया जाता है।

Mukesh Gusaiana
लेखक परिचय

Mukesh Gusaiana

हिंदी न्यूज़ राइटर एवं डिजिटल कंटेंट क्रिएटर

मुकेश गुसाईना न्यूज़ फ़ास्ट के हिंदी न्यूज़ राइटर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। वह कृषि, मंडी भाव, सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार, बिजनेस, टेक्नोलॉजी,और देश-दुनिया की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं।