Sarson Ki Buwai 2026: सरसों बोने का सही समय आ गया, किसान इन बातों का रखें ध्यान; वरना पैदावार पर पड़ सकता है असर

सरसों की बुवाई का सही समय क्षेत्र, सिंचाई की उपलब्धता, मिट्टी की नमी और चुनी गई किस्म के अनुसार बदल सकता है।
रबी सीजन में तैयार खेत में सरसों की बुवाई करता किसान

Is Bar Sarson Ki Buwai Kab Karein: रबी सीजन शुरू होने के साथ सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए खेत तैयार करने का समय आ गया है। खासकर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर भारत के दूसरे सरसों उत्पादक क्षेत्रों में किसान बुवाई की तैयारी में जुटने लगे हैं।

लेकिन सरसों में अच्छी पैदावार की शुरुआत केवल अच्छी किस्म चुनने से नहीं होती। बुवाई का सही समय, खेत में नमी, बीज की मात्रा, बुवाई की गहराई और कतारों के बीच दूरी भी महत्वपूर्ण है।

4 अक्टूबर के समय किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरसों अभी बोई जाए या कुछ दिन इंतजार किया जाए।

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इसका जवाब खेत की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

सरसों की बुवाई का सही समय क्या है?

सरसों की बुवाई के लिए पूरे भारत में एक तारीख तय नहीं की जा सकती। क्षेत्र की जलवायु, सिंचाई की उपलब्धता, मिट्टी में नमी और चुनी गई किस्म के अनुसार बुवाई का समय बदल सकता है।

ICAR की कृषि सलाह के अनुसार उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के मैदानी क्षेत्रों में बारानी परिस्थितियों में अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा सरसों की बुवाई के लिए उपयुक्त माना गया है।

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वहीं सिंचित परिस्थितियों में नवंबर का पहला पखवाड़ा भी उपयुक्त बुवाई अवधि में आता है।

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कुछ क्षेत्रों और किस्मों के लिए स्थानीय सिफारिश इससे अलग हो सकती है। इसलिए किसान अपने जिले की कृषि सलाह को प्राथमिकता दें।

4 अक्टूबर को क्या करें किसान?

अगर आपके इलाके में अनुशंसित बुवाई अवधि अभी शुरू नहीं हुई है तो केवल जल्दी फसल लगाने के उद्देश्य से जल्दबाजी करना सही नहीं होगा।

इस समय किसान:

  • खेत की अंतिम तैयारी कर सकते हैं
  • मिट्टी में नमी जांच सकते हैं
  • प्रमाणित बीज की व्यवस्था कर सकते हैं
  • अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म चुन सकते हैं
  • मिट्टी जांच के आधार पर पोषण योजना तैयार कर सकते हैं
  • जरूरत हो तो बुवाई से पहले पलेवा कर सकते हैं

बारानी क्षेत्र में मिट्टी में बची नमी का सही उपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

सरसों का कितना बीज चाहिए?

बीज की मात्रा किस्म, बुवाई की स्थिति और कृषि सिफारिश के अनुसार बदल सकती है।

ICAR की कृषि सलाह में सरसों के लिए लगभग 3–4 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर बताई गई है।

एक हेक्टेयर लगभग 2.47 एकड़ होता है। इस हिसाब से यह मोटे तौर पर करीब 1.2–1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ बैठता है।

हालांकि किसान इसे सार्वभौमिक मात्रा न मानें। हाइब्रिड, किस्म और बुवाई की परिस्थितियों के अनुसार बीज दर अलग हो सकती है।

बीज ज्यादा डालने से ज्यादा पैदावार जरूरी नहीं

कुछ किसान ज्यादा पौधे पाने के लिए जरूरत से अधिक बीज डाल देते हैं, लेकिन बहुत घनी फसल उल्टा नुकसान कर सकती है।

पौधों की संख्या जरूरत से ज्यादा होने पर धूप, हवा, नमी और पोषक तत्वों के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

इसलिए प्रमाणित बीज और अनुशंसित seed rate को प्राथमिकता देना बेहतर है।

कितनी दूरी पर बोएं सरसों?

सरसों की लाइन में बुवाई करने से फसल प्रबंधन आसान हो सकता है।

ICAR की कृषि सलाह में परिस्थितियों के अनुसार कतार से कतार लगभग 30–45 सेंटीमीटर दूरी का उल्लेख मिलता है।

उचित दूरी से पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और बाद में निराई-गुड़ाई तथा खेत की निगरानी भी आसान रहती है।

स्थानीय किस्म की recommendation अलग हो तो उसी को प्राथमिकता दें।

बीज बहुत गहरा न बोएं

सरसों का बीज छोटा होता है। इसलिए बहुत गहरी बुवाई अंकुर निकलने में समस्या पैदा कर सकती है।

सामान्य कृषि सलाह में सरसों के बीज को लगभग 2–3 सेंटीमीटर गहराई पर बोना उपयुक्त माना जाता है।

लेकिन वास्तविक गहराई मिट्टी की बनावट और खेत की नमी के अनुसार थोड़ी बदल सकती है।

बुवाई से पहले बीज उपचार क्यों जरूरी?

बीज से फैलने वाले कुछ रोग शुरुआती अवस्था में फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इसलिए स्वस्थ और प्रमाणित बीज का चुनाव करने के साथ अनुशंसित बीज उपचार महत्वपूर्ण है।

किसान अपने क्षेत्र में कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में अनुशंसित बीज उपचार ही अपनाएं। बिना सलाह के किसी रसायन की मात्रा तय करना उचित नहीं है।

सरसों में सल्फर का भी रखें ध्यान

सरसों तिलहनी फसल है और इसके पोषण प्रबंधन में सल्फर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

लेकिन खाद की मात्रा अनुमान से तय करने के बजाय मिट्टी की जांच के आधार पर तय करना बेहतर है।

नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर और दूसरे पोषक तत्वों की आवश्यकता खेत की मिट्टी और पिछले फसल चक्र के अनुसार अलग हो सकती है।

सिंचाई कब करें?

सिंचाई का schedule भी सभी खेतों के लिए समान नहीं होता।

ICAR की कृषि सलाह में सामान्य परिस्थितियों में पहली महत्वपूर्ण सिंचाई बुवाई के करीब 30–35 दिन बाद करने का उल्लेख मिलता है। जरूरत पड़ने पर फलियों में बीज बनने की अवस्था में दूसरी सिंचाई महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि सिंचाई की वास्तविक जरूरत मिट्टी की नमी, बारिश, तापमान और खेत की जलधारण क्षमता देखकर तय करनी चाहिए।

खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए।

कौन-सी किस्म लगाएं?

सरसों में किस्म का चुनाव केवल ज्यादा पैदावार का दावा देखकर नहीं करना चाहिए।

किस्म चुनते समय देखें:

  • किस राज्य/जोन के लिए अनुशंसित है
  • सिंचित या बारानी क्षेत्र
  • समय पर या पछेती बुवाई
  • पकने की अवधि
  • रोग प्रतिरोध
  • मिट्टी की स्थिति

ICAR-Indian Institute of Rapeseed-Mustard Research की सूची में अलग-अलग agro-climatic zones और परिस्थितियों के लिए अलग किस्में उपलब्ध हैं।

उदाहरण के तौर पर 2025 में अधिसूचित DRMR 2018-25 (BPM 1825) को समय पर बोई जाने वाली सिंचित परिस्थितियों के लिए Zone II—जिसमें जम्मू, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं—के लिए अनुशंसित बताया गया है।

इसलिए किसान अपने क्षेत्र के लिए officially recommended variety चुनें।

देर हो जाए तो वही किस्म न लगाएं

समय पर बुवाई और पछेती बुवाई के लिए किस्में अलग हो सकती हैं।

अगर धान या दूसरी फसल की कटाई के कारण सरसों की बुवाई देर से हो रही है तो सामान्य समय वाली किस्म को बिना जांचे बोने के बजाय पछेती परिस्थितियों के लिए अनुशंसित किस्म चुनना बेहतर होगा।

ICAR की कृषि सलाह में सिंचित पछेती बुवाई के लिए भी अलग किस्मों का उल्लेख किया गया है।

अच्छी पैदावार के लिए इन गलतियों से बचें

किसान बुवाई के दौरान खास तौर पर इन गलतियों से बचें:

  • क्षेत्र की सलाह देखे बिना बहुत जल्दी बुवाई
  • बहुत ज्यादा बीज डालना
  • बीज को बहुत गहरा बोना
  • गलत किस्म चुनना
  • बिना मिट्टी जांच जरूरत से ज्यादा खाद देना
  • खराब या अस्वस्थ बीज इस्तेमाल करना
  • खेत में जल निकासी की व्यवस्था न रखना

सरसों की फसल की शुरुआत जितनी संतुलित होगी, आगे उसका प्रबंधन उतना ही आसान हो सकता है।

किसान अंतिम फैसला कैसे करें?

4 अक्टूबर को देखकर पूरे देश के किसानों को तुरंत सरसों बोने की सलाह देना उचित नहीं होगा।

अपने जिले का मौसम, खेत की नमी, सिंचाई की उपलब्धता और चुनी गई किस्म की अनुशंसित बुवाई अवधि देखें।

बारानी खेती करने वाले किसान खास तौर पर उपलब्ध मिट्टी की नमी को ध्यान में रखें, जबकि सिंचित किसान सही तापमान और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार बुवाई का समय चुन सकते हैं।

सरसों की बुवाई कब करनी चाहिए?

समय क्षेत्र और सिंचाई की स्थिति पर निर्भर करता है। ICAR की कृषि सलाह में उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में बारानी परिस्थितियों के लिए अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा और सिंचित परिस्थितियों में नवंबर का पहला पखवाड़ा उपयुक्त बताया गया है।

एक एकड़ में कितना सरसों का बीज लगता है?

ICAR की 3–4 किलो प्रति हेक्टेयर की सामान्य बीज दर लगभग 1.2–1.6 किलो प्रति एकड़ बैठती है। वास्तविक मात्रा किस्म और स्थानीय recommendation के अनुसार बदल सकती है।

सरसों कितनी गहराई पर बोनी चाहिए?

सामान्य परिस्थितियों में करीब 2–3 सेंटीमीटर गहराई उपयुक्त हो सकती है। बहुत गहरी बुवाई से अंकुरण प्रभावित हो सकता है।

सरसों में लाइन से लाइन कितनी दूरी रखें?

सामान्य सलाह में लगभग 30–45 सेंटीमीटर की दूरी उपयोग की जाती है। किस्म और स्थानीय सिफारिश को प्राथमिकता दें।

क्या देर से भी सरसों बो सकते हैं?

हां, कुछ परिस्थितियों में पछेती बुवाई की जा सकती है, लेकिन इसके लिए देर से बुवाई हेतु अनुशंसित किस्म चुनना महत्वपूर्ण है।

Mukesh Gusaiana
लेखक परिचय

Mukesh Gusaiana

हिंदी न्यूज़ राइटर एवं डिजिटल कंटेंट क्रिएटर

मुकेश गुसाईना न्यूज़ फ़ास्ट के हिंदी न्यूज़ राइटर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। वह कृषि, मंडी भाव, सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार, बिजनेस, टेक्नोलॉजी,और देश-दुनिया की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं।