Haryana Horticulture Subsidy: हरियाणा के किसानों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के साथ फल, सब्जी, फूल, मसाले और खुशबूदार पौधों की खेती की ओर बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद दे रही है। इसके लिए सरकार ने ‘बागवानी फसलों की खेती के लिए अनुदान प्रावधान’ योजना लागू की है।
योजना के तहत पात्र किसानों को अलग-अलग बागवानी फसलों के हिसाब से प्रति एकड़ सब्सिडी दी जाएगी। नए फल बाग लगाने वाले किसानों को सबसे ज्यादा 1.40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है।
सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ प्रदेश में अलग-अलग तरह की फसलों की खेती को बढ़ावा देना है।
किन फसलों की खेती पर मिलेगी सब्सिडी?
इस योजना के तहत हरियाणा के किसान कई तरह की बागवानी फसलों की खेती पर सरकारी मदद प्राप्त कर सकते हैं।
इनमें मुख्य रूप से फल, सब्जियां, फूल, मसाले और खुशबूदार पौधे शामिल हैं।
हालांकि योजना के तहत लाभ लेने के लिए खेती के क्षेत्र की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की गई है।
नए फल बाग लगाने और मसालों की खेती करने वाले किसान अधिकतम 5 एकड़ तक योजना का लाभ ले सकते हैं।
सब्जियों की खेती में सामान्य वर्ग के किसानों के लिए अधिकतम सीमा 5 एकड़ रखी गई है।
वहीं अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग के किसान सब्जियों की खेती के लिए अधिकतम 1 एकड़ तक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
फूलों और खुशबूदार पौधों की खेती पर अधिकतम 5 एकड़ तक योजना का लाभ लिया जा सकता है।
फल बाग लगाने पर 1.40 लाख रुपये तक की मदद
इस योजना में सबसे ज्यादा आर्थिक सहायता नए फल बाग लगाने पर मिल सकती है।
फसल के हिसाब से नए फल बाग लगाने वाले किसानों को 24,500 रुपये से लेकर 1.40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक की सब्सिडी दी जाएगी।
यानी किसान को मिलने वाली वास्तविक राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि वह किस तरह का नया फल बाग लगा रहा है।
योजना का उद्देश्य किसानों को बागवानी से जोड़कर उनकी खेती से होने वाली आमदनी बढ़ाना है।
सब्जियों की खेती पर कितनी सब्सिडी?
सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए भी योजना में अलग से आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
सामान्य वर्ग के किसानों को सब्जियों की खेती पर 15,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी।
वहीं अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग के किसानों के लिए यह राशि 25,500 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित की गई है।
इसका लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित आधुनिक खेती के मॉडल अपनाने होंगे।
मसाले, फूल और खुशबूदार पौधों पर भी मिलेगा पैसा
योजना केवल फल और सब्जियों तक सीमित नहीं है।
मसालों की खेती करने वाले किसानों को 15,000 रुपये से 30,000 रुपये प्रति एकड़ तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है।
फूलों की खेती के लिए सरकार ने 8,000 रुपये से 40,000 रुपये प्रति एकड़ तक सब्सिडी का प्रावधान किया है।
वहीं खुशबूदार पौधों की खेती करने वाले किसानों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ तक सहायता मिलेगी।
इस तरह किसान अपनी जमीन, क्षेत्र और बाजार की मांग के अनुसार अलग-अलग बागवानी फसलों का चयन कर योजना का फायदा उठा सकते हैं।
सब्सिडी के लिए अपनानी होंगी ये आधुनिक तकनीकें
सरकारी सहायता पाने के लिए केवल बागवानी फसल लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा।
किसानों को खेती में कुछ आधुनिक तकनीकों को भी अपनाना होगा।
इनमें मल्चिंग, लो टनल, ड्रिप सिंचाई और बांस की स्टेकिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं।
इन तकनीकों के इस्तेमाल से पानी की बचत के साथ फसल की बेहतर देखभाल करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
योजना के जरिए सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक बागवानी तकनीकों से भी जोड़ना चाहती है।
सीधे बैंक खाते में आएगी सब्सिडी
योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के भुगतान की प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है।
पात्र किसान को मिलने वाली पूरी सब्सिडी सीधे उसके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
हालांकि बैंक खाते में राशि आने से पहले किसान को योजना से जुड़ी जरूरी आवेदन और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
आवेदन से पहले ये दो Registration जरूरी
योजना का फायदा लेने के इच्छुक किसानों के लिए कुछ जरूरी शर्तें निर्धारित की गई हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान का ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण होना चाहिए।
इसके साथ ही किसान का Hortnet पर भी रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है।
इन दोनों जरूरी पंजीकरण के बिना किसान योजना का लाभ नहीं ले पाएगा।
आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत?
योजना के लिए आवेदन करते समय किसानों को अपनी जरूरी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
आवेदक को अपना व्यक्तिगत विवरण देना होगा।
इसके साथ परिवार पहचान पत्र यानी PPP की जानकारी भी जरूरी होगी।
किसान को अपने बैंक खाते की पूरी जानकारी देनी होगी, जिसमें:
बैंक खाता संख्या
बैंक का नाम
बैंक शाखा
IFSC Code
जैसी जानकारियां शामिल हैं।
अगर किसान अनुसूचित जाति वर्ग से योजना का लाभ लेना चाहता है तो जरूरत पड़ने पर उसे SC प्रमाण पत्र भी देना होगा।
आवेदन करने से पहले किसान क्या करें?
योजना के तहत अलग-अलग फसलों के लिए मिलने वाली सब्सिडी की राशि अलग-अलग है।
इसलिए किसान आवेदन करने से पहले अपने नजदीकी जिला उद्यान अधिकारी से संपर्क कर योजना की पात्रता, संबंधित फसल और मिलने वाली सहायता की ताजा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके बाद किसान अपनी फसल और खेती के क्षेत्र के अनुसार योजना के लिए जरूरी पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकता है।
किसानों के लिए कितनी फायदेमंद है योजना?
हरियाणा में गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों की खेती बड़े स्तर पर होती है। सरकार अब किसानों को इसके साथ दूसरी अधिक मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
फल, सब्जी, फूल, मसाले और खुशबूदार पौधों की खेती करने वाले किसानों को आर्थिक मदद मिलने से शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है।
खासतौर पर नए फल बाग लगाने पर किसानों को 24,500 रुपये से लेकर 1.40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक की सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा सब्जी, फूल, मसाले और खुशबूदार पौधों के लिए भी अलग-अलग दरों पर आर्थिक सहायता का प्रावधान है।
ऐसे में बागवानी की खेती करने या इसकी शुरुआत करने की योजना बना रहे हरियाणा के किसानों के लिए यह योजना उपयोगी साबित हो सकती है।
हरियाणा में किसानों को 1.40 लाख रुपये की सब्सिडी किस खेती पर मिलेगी?
नए फल बाग लगाने पर फसल के अनुसार 24,500 रुपये से लेकर 1.40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक सब्सिडी मिल सकती है।
सब्जियों की खेती पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
सामान्य वर्ग के किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ और अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को 25,500 रुपये प्रति एकड़ की सहायता का प्रावधान है।
फूलों की खेती पर कितनी सहायता मिलेगी?
फूलों की खेती पर फसल के हिसाब से 8,000 रुपये से 40,000 रुपये प्रति एकड़ तक सहायता मिल सकती है।
मसालों की खेती पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
मसालों की खेती करने वाले किसानों को 15,000 रुपये से 30,000 रुपये प्रति एकड़ तक सहायता देने का प्रावधान है।
योजना का लाभ लेने के लिए कहां Registration करना होगा?
किसान का ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल और Hortnet दोनों पर पंजीकरण होना जरूरी है।
सब्सिडी का पैसा कैसे मिलेगा?
योजना के तहत स्वीकृत सब्सिडी सीधे पात्र किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।








