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आप भी तो नहीं डाल रहे हैं खेत में नकली खाद, ऐसे करें नकली फर्टिलाइजर की पहचान

Newz Fast, New Delhi खाद के दाने को हाथ में लेते ही बहुत कुछ पता चल जाता है। सबसे पहले असली डीएपी के बारे में जान लें। यह सख्त, दानेदार, भूरा, काले रंग का होता है और नाखूनों से आसानी से नहीं टूटता।
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fake fertilizer in fields
नकली खाद बेचकर अपनी झोली भर रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। लिहाजा किसान भाइयों को इससे सावधान रहना चाहिए और पूरी बुद्धिमानी

देश के कई हिस्सों में रासायनिक खाद की किल्लत है। हर दिन मीडिया में किसानों की लंबी लाइनें दिखती हैं जो खाद की बोरी लेने के लिए घंटों-घंटे कतार में खड़े होते हैं। कई घंटे लाइन में लगने के बाद भी उन्हें खाद नहीं मिल पाता। इससे उनकी खेती पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इस बीच कुछ ऐसे तत्व भी पनप रहे हैं जो किसानों को नकली खाद बेचकर अपनी झोली भर रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। लिहाजा किसान भाइयों को इससे सावधान रहना चाहिए और पूरी बुद्धिमानी के साथ नकली-असली खाद की पहचान कर लेनी चाहिए। इससे खेती चौपट होने से बच जाएगी और गाढ़ी कमाई भी बचेगी।

यूपी के मुजफ्फरनगर में रविवार को पुलिस ने एक नकली खाद फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। फैक्ट्री के पर्दाफाश होने की खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई और जिन-जिन लोगों ने बाजार से खाद की बोरी खरीदी थी, वे चिंता में पड़ गए। पुलिस ने नकली खाद फैक्ट्री के मालिक रमेश पाल को गिरफ्त में ले लिया। उसके अड्डे से 170 खाली बोरियां मिली हैं जिनपर देश की नामी कंपनियों के नाम और लोगो छपे मिले हैं।

बरामद सामान से साफ है कि नकली खाद बनाने का काम बहुत पहले से चल रहा था। दरअसल, पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी जिसके बाद उसकी टीम ने कूकड़ा गांव स्थित इस फैक्ट्री पर छापा मारा। यह फैक्ट्री नई मंडी कोतवाली के इलाके में पड़ती है। बताया जा रहा है कि नकली फैक्ट्री का मालिक रमेश आसपास के कई जिलों में नकली खाद सप्लाई करता था।

इन बुनियादी फर्क को ध्यान में रखें
ऐसे में जब भी आप बाजार में खाद खरीदने चलें तो कुछ बुनियादी फर्क को ध्यान में रखें। शायद ही कोई दिन या समय हो जब बाजार में असली के साथ नकली खाद भी धड़ल्ले से न बिकते हों। वजह ये है कि लोग इन दोनों में बुनियादी अंतर नहीं समझ पाते और पूरा पैसा देकर खाद के नाम पर घटिया माल उठा लाते हैं। इससे बनी-बनाई फसल चौपट हो जाती है। किसान भाई सोचते हैं कि खेत में पूरा पैसा लगाकर खाद डाला या कीटनाशक का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद फसल क्यों पिट गई। इसकी वजह नकली खाद या नकली कीटनाशक होते हैं।

कैसे करें असली-नकली की पहचान
नकली और असली खाद को पहचानना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। खाद के दाने को हाथ में लेते ही बहुत कुछ पता चल जाता है। सबसे पहले असली डीएपी के बारे में जान लें। यह सख्त, दानेदार, भूरा, काले रंग का होता है और नाखूनों से आसानी से नहीं टूटता। यदि कुछ डीएपी के दाने को चूने से रगड़ा जाता है, तो इससे तेज गंध निकलती है जो बर्दाश्त नहीं होती। अगर इसे धीरे-धीरे गर्म प्लेट में गर्म किया जाता है, तो इसके दाने फूल जाते हैं। इसी तरह यूरिया को भी चेक कर सकते हैं। यूरिया के असली दाने सफेद, चमकदार, आकार में एक समान और गोल आकार के होते हैं। जब घोल को छुआ जाता है, तो यह पानी में पूरी तरह से घुलनशील होता है और ठंडा महसूस होता है। गर्म प्लेट में रखने पर यह पिघल जाता है।

कैसे बनती है नकली खाद
नकली खाद बनाने वाले खाद बनाने की सामान से लेकर पैकिंग तक के मटीरियल रखते हैं। जैसा कि कई छापेमारी में सामान जब्त किए गए हैं, उससे पता चलता है कि नकली खाद बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल होता है। इसके लिए जालसाजी करने वाले लोग इलेक्ट्रिक मिक्सचर मशीन जिसमें खाद का मटीरियर मिलाया जाता है, सिलाई मशीन जिससे खाद के छोटे थैले या बड़ी बोरी सिलाई की जाती है, बोरी पर प्रिंटिंग के लिए छोटी मशीन, नमक की बोरी, बदरपुर, गेरू, फावड़ा और बेलचा रखा जाता है। इन सभी चीजों का इस्तेमाल खाद बनाने से लेकर पैकिंग आदि में किया जाता है।

पुलिक की धरपकड़ में आरोपितों ने बताया है कि नकली खाद बनाने के लिए जमी हुई खाद खरीदी जाती है। इसके बाद मिक्सचर मशीन में गेरू, नमक और बदरपुर को एक साथ मिला देते हैं। इसकी बाद इस नकली खाद को इफको, आईपीएल समेत देश की बड़ी कंपनियों के नकली नाम से बोरी में भर देते हैं। इसकी पैकिंग और सीलिंग इस ढंग से की जाती है कि किसी को भी नकली होने की भनक न लगे। ऐसी नकली खाद की बोरी बाजार में असली खाद की तुलना में आधे दाम पर मिल जाती है।