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कपास की बढ़ती कीमतों से क्या किसानों की आमदनी भी बढ़ रही है? जानिए पूरा मामला

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cotton prices are increasing

महाराष्ट्र में खरीफ सीजन में शुरू हुआ संकट अब भी जारी रुक-रुक कर हो रही बारिश से सोयाबीन को भारी नुकसान हुआ है। इसका असर उत्पादन और कीमतों पर भी पड़ रहा है। दो दिन पहले हुए बारिश के कारण धान, प्याज और मूंगफली की फसलें खराब हुई है। ये सब तो प्राकृतिक आपदाएं थी। लेकिन अब जो संकट किसानों के सामने आया हैं वो अलग हैं। ख़ास करके कपास उत्पादक किसानों के लिए। इस समय महाराष्ट्र में कपास का अच्छ दाम 9,000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा हैं। इसिलए किसान जल्दी ही कपास को बेचना चाहते है।

कपास ही एकमात्र खरीफ फसल है जिसके दाम दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। वहीं यवतमाल जिले में कपास की कटाई के लिए किसानों को परेशानी हो रही है। लेबर के अभाव में बिक्री ठप है। इसके अलावा समय पर कपास की कटाई न हो पाने पर उत्पादन और कीमतों को प्रभावित कर रही है। कपास का उत्पादन कम होने और मांग अधिक होने के कारण दरें बढ़ रही हैं। आब जब कपास केंद्र भी शुरू हो गए हैं, तो इसे बेचना आसान हो गया है। लेकिन राज्य में कटाई के लिए कोई श्रम नहीं है। इसलिए किसानों को परेशानी हो रही है। अब किसानों को रुक कर कपास की कटाई कटाई करनी पड़ रही है।

कपास 9,000 रुपये प्रति क्विंटल

तीन महीने पहले कपास की कीमत 6,500 रुपये थी। एक तरफ जहां सोयाबीन की कीमतों में दिन-प्रति-दिन गिरावट आ रही है। वहीं दूसरी तरफ कपास की कीमतों में भी तेजी आ रही है। इस साल मराठवाड़ा में कपास का रकबा कम हुआ था जबकि सोयाबीन का रकबा बढ़ा था। नतीजतन मराठवाड़ा में किसानों को दोहरा नुकसान हुआ जबकि यवतमाल और खानदेश में उत्पादन में वृद्धि ने किसानों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। कपास खरीदने के लिए विदेशी व्यापारी उमड़ रहे हैं। कपास की कीमतों में तीन महीने में 3,000 रुपये की तेजी आई है। इसके अलावा भविष्य में भी दरों में वृद्धि की उम्मीद है। इसलिए किसान कटाई के साथ-साथ भंडारण पर भी ध्यान दें।

मजदूरी दरें क्या हैं?

पौष्टिक वातावरण ने कपास के उत्पादन में वृद्धि की है। लेकिन श्रम के अभाव में कपास की कटाई ठप है। यवतमाल जिले के कई किसानों को अपनी दिवाली खेतों में बितानी पड़ती है। ऐन दिवाली पर कटाई का काम भी शुरू हो गया था। दिवाली के बाद कपास की बिक्री में तेजी आई है। भाव 8500 से 9000 हजार प्रति क्विंटल है और जरूरतमंद किसान इसे बेच रहे हैं। लेकीन के कटाई के लिए मज़दूर नही मिल रहे हैं। यदि कपास लंबे समय तक बिना कटाई के रहती है, तो यह दर को प्रभावित करेगी। इसलिए किसानों का पूरा परिवार अब कपास बेचने में लगा हुआ है। गांव में मजदूर नहीं होने के कारण जिले के मजदूरों को अधिक मजदूरी और परिवहन का भुगतान किसान को देना पड़ रहा हैं।