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महिला की कमाई भी महत्वपूर्ण है, इसे फिजूलखर्च में यूं ही नहीं उड़ाएं

आज के समय में महिलाओं का कामकाजी होना आम हो चला है। वेतन के रूप में आय का यह दूसरा स्रोत पूरे परिवार के हित में होता है।
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Newz Fast,New Delhi  महिला की कमाई से ज़ाहिर तौर पर परिवार का जीवनस्तर सुधरता है और सुविधाओं, पोषण व बच्चों की पढ़ाई के लिए भी बेहतर प्रबंध किए जा सकते हैं।

लेकिन इससे जुड़ी एक दिक़्क़त भी है। पति या बच्चों में इस आय को "अतिरिक्त' मानकर लापरवाही से ख़र्च करने की प्रवृत्ति पनप सकती है।

बेटे की लापरवाही मां की समस्या

इन दिनों अखिल बार-बार सनी के घर के चक्कर लगा रहा था और सनी उससे मिलने से कतराता था। अपनी मां नीलम से वह अक्सर कह देता कि अखिल को कह दो कि सनी घर पर नहीं है।

कभी-कभी दोनों बंद कमरे में काफ़ी देर तक बातें करते और अखिल उखड़े हुए मूड के साथ चला जाता। नीलम ने पूछताछ की तो पता चला कि सनी ने कमोडिटी मार्केट में बड़े सौदे किए हैं,

जिनमें उसे नुक़सान हो गया तो अखिल से उधार लेकर उसने वे पैसे चुका दिए। लेकिन अब अखिल के पैसे नहीं चुका पा रहा।

पति का लोन चुकाए या घर ख़र्च चलाए?

आज फिर नलिनी का मूड ऑफ़ हो गया। घर आए रिकवरी एजेंट से पता चला कि उसके पति राकेश ने एक और लोन ले रखा है जिसकी ईएमआई बीते नौ महीनों से बकाया है।

राकेश की इस हरकत से पहले भी दोनों में कई बार मनमुटाव हो चुका है। अपनी बिज़नेस इनकम से ज़्यादा लोन ले चुका राकेश चाहता है कि उसकी ईएमआई नलिनी चुकाए। समस्या यह है कि फिर घर ख़र्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे ज़रूरी ख़र्च कैसे चलेंगे?

कई बार अपने युवा बच्चों और पति की ग़ैर जि़म्मेदाराना आदतों से वर्किंग वुमन गहरे धर्मसंकट में फंस जाती हैं। हमारा सामाजिक ताना-बाना कुछ ऐसा है

कि अपनी कमाई में से वह गै़रज़रूरी मदों में भी ख़र्च करने या पैसे देने से इनकार करे तो उसे घमंडी, मुंहफट और असहयोगी होने का तमग़ा दे दिया जाता है।

लेकिन परिवार, और लंबे समय में ख़ुद की भलाई के लिए कभी-कभी दृढ़तापूर्वक ऐसी मांगों को नकारना ज़रूरी है। नरमी, ढीलढाल या ऐसी अवांछित डिमांड के आगे झुक जाना भारी पड़ सकता है।

अगर बेवजह ले रखे हैं कई लोन...

कई बार बच्चे और पति स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग, दोस्तों के सामने शेख़ी बघारने या शौक़ीन स्वभाव होने के कारण कार, बाइक, इलेक्ट्रॉनिक एप्लायंस, बड़ा फ्लैट आदि ख़रीद लेते हैं।

इन सबके लिए बड़ा लोन भी ले लेते हैं। बाद में जब आर्थिक दबाव पड़ता है तो वे अपनी मां या पत्नी पर दबाव डालते हैं कि वह अपनी इनकम से ईएमआई चुकाए।

ऐसी सिचुएशन में आप पहली ही बार में पूरी सख़्ती से मदद के लिए मना कर दें, भले ही उन्हें बुरा लगे। एक बार भी आपने पैसे दे दिए तो आपको इससे कभी छुटकारा नहीं मिलने वाला।

बेहतर होगा कि ऐसी ख़रीद की सुगबुगाहट मिलते ही शुरू से ही उन्हें अपने रुख़ से वाकिफ़ करवा दें।

फ्लैट या मकान हरगिज़ ना बेचने दें

कई बार अपनी गै़र जि़म्मेदारी या अपरिपक्वता की वजह से बच्चे या पति ग़लत राह पर आगे बढ़ जाते हैं। फिजू़लख़र्ची, अदूरदर्शिता और बिना सोचे जोखिम लेने की आदत से ऐसा होता है।

ऐसे में वे अपने परिवार की इज़्ज़त और दूसरे कारणों का हवाला देते हुए आपको मकान बेचने के लिए बाध्य करते हैं। लेकिन ऐसा करने का मतलब है सिर से छत का हट जाना। मकान या फ्लैट आपके नाम पर है तो हरगिज़ न झुकें।

साफ़ बात कर लेना ही उचित है

बच्चे छोटे हैं तो उन्हें समझाएं कि मम्मी की सैलरी घूमने-फिरने, खाने-पीने और शौक़िया चीज़ें ख़रीदने के लिए ही नहीं है। इसके बजाय, पापा की तरह मम्मी की कमाई भी मकान, अच्छे पोषण,

सुरक्षित निवेश और पढ़ाई आदि के लिए महत्वपूर्ण है। घर के सदस्यों में महिला की कमाई के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए, ताकि उसकी एक पाई भी ख़र्च करवाने से पहले वे गंभीरता से सोचें।

उन्हें स्पष्ट बता दें कि आपकी कमाई को उड़ाया जा सकता है या कहीं भी लगाया जा सकता है, ऐसा ख़्याल भी उचित नहीं होगा। इससे बच्चों सहित पूरे परिवार का भविष्य प्रभावित होगा।

यदि चाहिए स्टार्टअप के लिए मदद...

बच्चों में कुछ नया करने का जोश होता है। अगर वे पूरी तैयारी और प्लानिंग के साथ कुछ करने के प्रति गंभीर हैं तो अच्छी बात है। लेकिन दोस्तों को देखकर या हवाई कल्पनाओं के बूते कुछ करेंगे तो वक़्त, ऊर्जा और पैसे की बर्बादी होगी।

इसलिए अगर बच्चा अपने किसी स्टार्टअप के लिए आप से वित्तीय मदद चाहे तो सबसे पहले उसका प्लान, एटीट्यूड, एनर्जी आदि देखें। आपको उसकी तैयारी पूरी लगे व भरोसा हो तो कुछ रक़म एक निश्चित अवधि के लिए दे सकती हैं।

लेकिन रक़म ज़्यादा हो या प्लानिंग सॉलिड ना लगे तो आपको सिर्फ़ उसका दिल रखने के लिए पैसे नहीं देने चाहिए। आपको ध्यान रखना चाहिए कि कहीं आपका इमरजेंसी फंड ख़ाली ना हो जाए।

अगर शौक़ीन हैं बड़ी सौदेबाज़ी के...

पति या बच्चे बड़े जोखिम लेने या फ्यूचर अथवा कमोडिटी मार्केट में लंबी-चौड़ी सौदेबाज़ी के शौक़ीन हैं तो नियमित रूप से उन्हें इसके ख़तरों से आगाह करती रहें।

उनकी इस आदत से उन्हें नुक़सान हो जाए और वे इमोशनल कार्ड खेलें तो भावुकता में न बह जाएं। आपको किसी बुज़ुर्ग या प्रभावशाली मित्र के ज़रिए उन्हें इस आदत को छोड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

बहरहाल, अगर आपने पैसे दे दिए हैं तो उसकी खोज-ख़बर लेती रहें कि उस मामले में क्या प्रगति हो रही है।